मुख्यपृष्ठनए समाचारराजनाथ जी, क्या हो गया है आपको?

राजनाथ जी, क्या हो गया है आपको?

-बोल रहे हैं, भाजपा ने कभी चुनाव प्रणाली पर शक नहीं किया?
-अरे नेताजी, आडवाणी की किताब तो खोलिए!
– अनिल तिवारी

राजनीति में याददाश्त कमजोर होना कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इतिहास को ही भुला देना भी गजब कला है! शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में फरमाया कि भाजपा ने कभी संवैधानिक संस्थाओं या चुनाव प्रणाली पर संदेह नहीं जताया। विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप भी लगाया।
अरे राजनाथ जी, ई कौन-सा इतिहास पढ़ा रहे हैं? जरा २००९ की फाइल खोलिए! भाजपा के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी। वर्ष २०१० में भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदा पुस्तक लिख डाली; डेमोक्रेसी एट रिस्क! कैन वी ट्रस्ट अवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स? तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पुस्तक का विमोचन करते हुए ईवीएम के साथ कागजी प्रमाण की आवश्यकता बताई थी।
अब बताइए नेता जी, तब सवाल उठाना लोकतंत्र की चिंता थी और आज सवाल उठाना लोकतंत्र के खिलाफ साजिश वैâसे हो गया?
राजनाथ जी ने विपक्ष पर बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उधर, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने विदेशी शक्तियों की मिलीभगत का आरोप लगा दिया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए।
भाईसाहब, हिंसा और अराजकता का विरोध बिल्कुल होना चाहिए। लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन, चुनावी प्रक्रिया पर सवाल और सरकार बदलने की लोकतांत्रिक मांग अपने आप में अपराध कब से हो गए?
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप साबित करना विपक्ष की जिम्मेदारी है। निष्पक्ष प्रक्रिया और शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का दायित्व है।
मगर असली तमाशा देखिए! जब भाजपा विपक्ष में थी, चुनावी मशीन पर सवाल उठाती थी। आज सत्ता में है तो सवाल उठाने वालों की नीयत पर सवाल उठा रही है! सत्ता बदलते ही सिद्धांत बदल गइल, इतिहास बदल गइल और सवाल पूछने का मतलब भी बदल गइल!
ई बताइए राजनाथ जी, इतिहास की याददाश्त सठिया गइल का… कि सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही पुरानी फाइलें दिखाई देना बंद हो गइल बा?

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