-स्कूलों की बदहाली से शुरू हुआ आंदोलन, पुलिस कार्रवाई में १५ वर्षीय छात्र का हाथ काटना पड़ा
फ्रांस में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और शिक्षकों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन एक महीने से अधिक समय बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। महंगाई, वेतन, पेंशन और सरकारी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे जुड़ने के बाद प्रदर्शन देशव्यापी आंदोलन में बदल गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक ८ लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और ६ हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, भरी हुई कक्षाओं, पीने के पानी की समस्या और खराब इमारतों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों की मांग है कि स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस आंदोलन की शुरुआत १७ सितंबर को पेरिस के पास क्रेतै के एक हाईस्कूल से हुई थी। शुरुआत में शिक्षकों और छात्रों ने संसाधनों की कमी के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन जल्द ही दूसरे स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें शामिल हो गए। ५ अक्टूबर को लेंस शहर में पुलिस के ग्रेनेड से १५ वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। चोट इतनी गंभीर थी कि उसका हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी और बढ़ गई।
रिपोर्टों के अनुसार, हिंसक झड़पों में छात्र, स्कूल कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। लिमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल में आगजनी और अन्य शहरों में सरकारी इमारतों में तोड़-फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। सरकार के सामने अब आंदोलन को शांत करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों का समाधान करने की चुनौती है।
