-अरुण कुमार गुप्ता
आस्था की किताब से
वोटों का सौदा?
चुनाव में वोट की कीमत विचारधारा, विकास और जनसेवा से तय होनी चाहिए, नोटों की गड्डियों से नहीं। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर से विधान परिषद चुनाव के बीच सामने आई एक रिपोर्ट ने चुनावी राजनीति की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि मतदाताओं तक नकदी पहुंचाने के लिए धार्मिक पुस्तक ‘दुर्गा सप्तशती’ के पन्नों का इस्तेमाल किया गया। इस कथित तरीके से जुड़ी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था से जुड़ी पुस्तक का नाम सामने आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पुस्तक के पन्नों के बीच नकदी रखकर घरों तक पहुंचाई जा रही थी। यदि जांच में यह साबित होता है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे बांटे गए, तो यह चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल होगा। लेकिन वायरल तस्वीर या वीडियो अपने आप में किसी अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह पता लगाना जरूरी है कि सामग्री किसने तैयार की, नकदी किसकी थी, उसे किस उद्देश्य से रखा गया और क्या वास्तव में किसी मतदाता को वोट के बदले पैसा देने की कोशिश हुई।
‘बिहार बड़ा है, हत्याएं होती रहेंगी!’
जेडीयू मंत्री का बेतुका बयान
बिहार में अपराधियों की गोलियों से जब लोगों की जान जा रही हो, तब सत्ता में बैठे लोगों से कानून-व्यवस्था पर सवाल पूछना लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार है। लेकिन सवालों का जवाब देने के बजाय अगर सरकार का कोई मंत्री यह कहे कि ‘इतना बड़ा बिहार है, हत्याएं होती रहती हैं, इसमें क्या कर सकते हैं’, तो सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि सत्ता की जवाबदेही का भी बन जाता है। बिहार सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा का ऐसा ही बयान विवादों में है। भोजपुर जिले में लगातार हुई हत्याओं के बाद पत्रकारों ने उनसे कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्री ने कहा कि हत्या तो होगी ही और पत्रकारों से अपराध के पीछे की वजह जानने की बात कही। उनके इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भोजपुर में दो दिनों के भीतर दो लोगों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। इनमें पूर्व कस्टम अधिकारी रामकुमार सिंह की हत्या का मामला भी शामिल है। मंत्री पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान अपराध पर सवाल पूछे जाने पर उनका बयान सामने आया।
नौ हत्याओं का बयान, मांझी का वार!
एनडीए के भीतर सुलग रहा सियासी बारूद
बिहार की राजनीति में ‘नौ हत्याओं’ के बयान ने ऐसा विस्फोट किया है कि अब सवाल सिर्फ अनंत सिंह की सफाई तक सीमित नहीं रहा। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग कर दी है। इससे विवाद को नया राजनीतिक आयाम मिल गया है। सत्ता पक्ष के भीतर उठती यह आवाज कई असहज सवाल खड़े कर रही है कि क्या गंभीर बयानों की जांच भी राजनीतिक समीकरण देखकर होगी, या कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा? विवाद तब भड़का, जब मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह के बयान को इस रूप में समझा गया कि उन्होंने नीतीश कुमार का साथ देने के लिए नौ लोगों की हत्या कराने का दावा किया है। मामला तूल पकड़ने पर अनंत सिंह ने सफाई दी कि उनके कहने का अर्थ अलग था। उनका दावा था कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उनके परिवार के नौ लोगों की हत्या हुई थी और वह उसी का जिक्र कर रहे थे।
