-बोले-चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को फिर करो शामिल
सामना संवाददाता / अमरावती/नई दिल्ली
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार करते हुए चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को फिर से शामिल करने की मांग की है। इस मांग को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर जारी राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जगन की यह मांग इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनकी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक का समर्थन किया था। अब पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के प्रति भरोसा बहाल करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है। इस बदले रुख ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
जगन मोहन रेड्डी ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को फिर से शामिल किया जाए। उनका यह रुख नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की बहस को नया आधार देता है। चुनाव आयोग देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में उसके शीर्ष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्थाओं के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है। चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर उठी मांग इसी बहस का हिस्सा है।
पहले समर्थन, अब बदला रुख
वाईएसआर कांग्रेस ने पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक का समर्थन किया था। अब पार्टी की ओर से उसी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। इसी वजह से जगन के इस कदम को उनके पुराने फैसले से पीछे हटने या राजनीतिक यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का तर्क है कि चुनाव आयोग के प्रति जनता और राजनीतिक दलों का विश्वास बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में जरूरी सुधार किए जाने चाहिए।
