सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार की आर्थिक बदहाली अब सरकारी कर्मचारियों की जेब तक पहुंच गई है। सूखे से तबाह किसानों को दिवाली पर पांच हजार रुपए की अग्रिम सहायता देने की घोषणा करने वाली महायुति सरकार के पास कथित तौर पर इस राहत के लिए पर्याप्त धन नहीं है। यह सरकार कंगाल हो चुकी है। आरोप है कि किसानों की मदद के नाम पर सरकारी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटकर मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है तो फिर चुनावी घोषणाओं और सत्ता के दिखावे के लिए खर्च के लिए धन कहां से आ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने सरकारी कर्मचारियों से एक दिन का वेतन सूखाग्रस्त किसानों के लिए देने का परिपत्र जारी किया है। अक्टूबर का वेतन खाते में आने से पहले ही एक दिन की तनख्वाह काटकर मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने और वहां से किसानों की सहायता के लिए धन हस्तांतरित करने की बात कही गई है।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खरीफ की खेती पर किया गया खर्च डूब गया है और रबी की फसल को लेकर भी आशंकाएं गहरा गई हैं। दिवाली जैसे त्योहार पर किसानों के घरों में खुशियों के बजाय आर्थिक संकट का अंधेरा छाया हुआ है।
