मुख्यपृष्ठस्तंभनीरो को भी पीछे छोड़ दिया ट्रंप ने!

नीरो को भी पीछे छोड़ दिया ट्रंप ने!

-जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था, इतिहास का यह प्रसंग
मनमोहन सिंह
निष्ठुरता और राजनीतिक संवेदनशून्यता का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण माना जाता है। लेकिन शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी का रोना रोने वाले अमेरिकी प्रेसिडेंट ने इस कुख्यात मानसिकता को भी पीछे छोड़ दिया है। अब वे केवल तमाशा नहीं देख रहे, बल्कि वैश्विक आपदाओं और हिंसक संघर्षों पर खुलकर ठहाके लगा रहे हैं।
इसका ताजा उदाहरण हाल ही में फ्रांस में देखने को मिला, जहां बढ़ती महंगाई, जन-असन्तोष और गंभीर आर्थिक संकट के चलते जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। पेरिस सहित फ्रांस के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन भयानक हिंसक रूप ले चुके थे। सड़कों पर आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ खूनी झड़पों का तांता लगा हुआ था। देश सुलग रहा था और आम नागरिक अपने भविष्य को लेकर त्रस्त थे।
किंतु, ऐसे सुलगते और गंभीर हालात पर भी संवेदना व्यक्त करने के बजाय, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपने मनोरंजन का साधन बना लिया। फ्रांस के हालातों पर तंज कसते हुए उन्होंने बड़े ही मजाकिया और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘डार्लिंग, राष्ट्रपति ने अभी हमें ५,००० डॉलर भेजे हैं। चलो फ्रांस चलें? यह बहुत प्यारी जगह है। वैसे, फ्रांस तो क्रांतियों के लिए एकदम बेहतरीन जगह लगती है! चलो फ्रांस चलते हैं और क्रांति में शामिल होते हैं।’
एक तरफ फ्रांस में आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे, लोग लहूलुहान हो रहे थे और संपत्तियां खाक हो रही थीं; तो दूसरी तरफ दुनिया के सबसे प्रभावशाली मुल्क के मुखिया इस मानवीय त्रासदी को एक हास्यास्पद ड्रामा की तरह पेश कर रहे थे। नीरो ने तो फिर भी मौन रहकर अपनी बंसी बजाई थी, लेकिन यहां तो संकट के समय व्यंग्य के तीर छोड़ना नेताओं का नया शगल बन गया है।
अब इसे नेताओं की सतही बयानबाजी कहें या वैश्विक पतन का नया पैमाना, यह साफ है कि जब दुनिया जलती है, तो हुक्मरानों के लिए वह सिर्फ एक तमाशा और चुटकुला बनकर रह जाती है।

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