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संपादकीय : यह दशहरा खास है!

विजयादशमी यानी दशहरे का महत्व हमारी संस्कृति में बेहद अनमोल है। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में हिंदू समाज ‘दशहरा’ मनाता है। इसके पीछे कई कथाएं हैं। भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके सीता माता को मुक्त कराया, सत्य की विजय हुई, इसलिए रावण-दहन करके दशहरा मनाया जाता है। देवी दुर्गा ने नौ दिनों तक युद्ध करके दशमी के दिन महिषासुर का वध किया था, इसीलिए नारी शक्ति की पूजा के रूप में दशहरा मनाया जाता है। महाभारत के अनुसार, अज्ञातवास में जाने से पहले पांडवों ने अपने शस्त्र शमी के वृक्ष पर छिपाकर रखे थे। विजयादशमी के दिन उन्होंने वे शस्त्र धारण करके कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए इस दिन शस्त्र-पूजा करके दशहरा मनाया जाता है। दशहरे का आनंद-उत्सव यह भी है कि मानसून में बोई गई पहली फसल खेतों से घर आती है और किसान इस खुशी को ‘दशहरा’ के रूप में मनाते हैं। दशहरा मनाने के ऐसे कई कारण हैं, लेकिन इन तीनों वजहों के मुताबिक खुशी मनाने जैसी स्थिति आज हमारे महाराष्ट्र या भारत में नहीं है। पांडवों ने कौरवों का नाश करने के लिए शस्त्र-पूजा की थी, लेकिन महाराष्ट्र में तो कौरवों के ही हाथों में शस्त्र हैं और वे सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी करके हत्याएं कर रहे हैं। दशहरे की पूर्व संध्या पर
विख्यात अभिनेता
टाइगर श्रॉफ पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गर्इं। ठाणे में प्रदीप पूर्णेकर नाम के शिवसेना पदाधिकारी की गोलियां मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। पूर्णेकर के हमलावरों को फिर से राजनीतिक संरक्षण हासिल है। इसलिए यहां अधर्म पर धर्म की जीत होती नहीं दिखती। धर्म को ग्लानि पहुंच चुकी है और भगवान के अवतार लेने के बजाय गुंडे और झुंड अवतार लेकर दहशत पैâला रहे हैं। ऐसे में दशहरे का ‘आनंद’ कैसे मनाया जाए? श्रीराम ने रावण का वध करके सीता को मुक्त कराया, इसे दशहरे की शुभकामना कहें तो आज कई माताएं-बहनें गुंडों के अत्याचार की शिकार हो चुकी हैं। दिल्ली के आंदोलन में महिलाओं का अनादर और यौन उत्पीड़न पुलिस ने ही किया, उन्हें बेरहमी से पीटा। मुंबई में भी यही हुआ। अयोध्या में राम-सीता के राज्य में चोरी और लूटपाट का कहर बरपा। राम-सीता के आभूषण और पैसा खुद भाजपा के रखवालों ने चुराया, तो फिर श्रीराम की पवित्रता क्या रह गई? देवी दुर्गा ने महिषासुर का मर्दन किया था, लेकिन आज चारों तरफ महिषासुर ही हावी हैं और वही राज कर रहे हैं। यह आज के दशहरे की हकीकत है। लोगों के जीवन की खुशी पूरी तरह गायब हो चुकी है। ‘रामराज्य’ खत्म होकर मानो ‘रावणराज्य’ शुरू हो गया है। इसलिए किस सोच और विचारों का सोना बांटा जाए और सीमोल्लंघन किया जाए? यह बड़ा सवाल है। लोगों के मन अशांत हैं और देश खौलता हुआ दिख रहा है। हुक्मरानों के
अन्याय के खिलाफ जनता
सड़कों पर उतरकर बगावत कर रही है। चुनाव लूटे जा रहे हैं। महंगाई और बेरोजगारी ने कहर बरपा रखा है। किसान सूखे की आग में झुलस रहा है। खाने को अन्न नहीं, पीने को पानी नहीं, मवेशियों के लिए चारा नहीं। कर्ज के बोझ से घरों और जमीनों पर बैंकों की कुर्की जारी है और मुख्यमंत्री फडणवीस ने पांच हजार रुपए की राहत देकर ‘आनंद मनाओ’ कहकर अन्नदाता का मजाक उड़ाया है। ‘दशहरा बड़ा त्योहार है, खुशियों की बहार है’ यह सिर्फ कहने की बात रह गई है। मोदी-शाह के शासन में खुशी का सूखा ही पड़ गया है। इसीलिए देश सुलग उठा है। दुनिया के कई देश, खासकर यूरोप के प्रâांस, इटली, बेल्जियम, जर्मनी, पुर्तगाल, ग्रीस में जनता महंगाई के खिलाफ बगावत कर उठी है। सत्ता को उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ जनता सड़कों पर उतरी है, आगजनी कर रही है। भारत की तस्वीर इससे अलग नहीं है। केंद्र सरकार तिरंगा फहराने पर पाबंदी लगा रही है, इससे घिनौना काम और क्या हो सकता है? दशहरे का आनंद अगर फिर से हासिल करना है, तो ‘रेजिम चेंज’ यानी सत्ताबदल करना ही होगा, सत्ता में बैठे रावणों को हराना ही होगा, इसी जिद के साथ उठ खड़े होना होगा। दशहरे के मौके पर शिवतीर्थ पर शिवसेना की दशहरा रैली लोगों की भावनाओं का विस्फोट करेगी, विचारों का सोना बरसाएगी और विचारों का तिरंगा फहराती रखेगी। पांडवों की तरह शमी के पेड़ से शस्त्र निकालकर जनयुद्ध का एलान करने का आज का दिन है। यह दशहरा खास है।

 

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