– जनता की गाढ़ी कमाई के १,७२५ करोड़ खर्च
– ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए २०२८ तक करना होगा इंतजार
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबईकरों के लिए जाम से जूझना एक दैनिक त्रासदी बन चुका है। मानखुर्द जंक्शन पर रोज लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से आम जनता को राहत दिलाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली मनपा और ठेकेदारों की सुस्त कार्यशैली अब जनता के लिए जी का जंजाल बन गई है। मानखुर्द जंक्शन पर यातायात को सुगम बनाने के लिए १,७२५.१२ करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनने वाले महत्वाकांक्षी डबल-डेकर फ्लाईओवर का काम अब तक महज ४०प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
प्रशासन की लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस प्रोजेक्ट की शुरुआत २०२४ में हुई थी, उसे पूरी तरह से धरातल पर उतरने में जनवरी २०२८ तक का लंबा समय लगने वाला है। यानी पीक आवर्स में मानखुर्द के चौराहे पर घंटों रेंगने वाले ऑफिस जाने वाले आम नागरिकों और नवी मुंबई के मोटर चालकों को अभी सालों तक इसी नरक से गुजरना पड़ेगा।
मनपा के ब्रिज डिपार्टमेंट के दावों के मुताबिक, मुख्य फाउंडेशन, पाइल वैâप और पियर्स का काम पूरा हो चुका है और यार्ड में पैâब्रिकेशन का काम चल रहा है। २०२७ में फ्लाईओवर का केवल एक ‘आर्म’ (हिस्सा) पूरा करने का नया लक्ष्य रखा गया है। सवाल यह उठता है कि जब हर साल जनता के टैक्स का हजारों करोड़ रुपया इन प्रोजेक्ट्स पर पानी की तरह बहाया जाता है, तब भी शहरवासियों को समय पर राहत क्यों नहीं मिलती?भले ही प्रशासनिक अधिकारी यह दलील दे रहे हैं कि इस डबल-डेकर फ्लाईओवर के बनने से (जो ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे की ओर सायन-पनवेल हाईवे के ऊपर से गुजरेगा) यात्रा का समय २० मिनट से घटकर महज ५ मिनट रह जाएगा और गोवंडी-मानखुर्द बेल्ट को जाम से मुक्ति मिलेगी, लेकिन २०२८ तक की लंबी समय-सीमा ने इन वादों की पोल खोल दी है।
