मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : चुनाव आयोग के खिलाफ ‘मॉक महाभियोग’

दिल्ली लाइव : चुनाव आयोग के खिलाफ ‘मॉक महाभियोग’

-अरुण कुमार गुप्ता
नई दिल्ली में विपक्षी दलों की प्रस्तावित ‘मॉक संसद’ का मकसद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सार्वजनिक बहस को तेज करना है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस आयोजन में सांसदों के साथ कानूनी विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों और आम लोगों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, आयोजन की अंतिम रूपरेखा और स्थल को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह वास्तविक संसदीय महाभियोग की कार्यवाही नहीं, बल्कि विरोध दर्ज कराने का प्रतीकात्मक मंच होगा। विपक्ष एसआईआर को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। उसका कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के नाम पर किसी पात्र मतदाता का अधिकार नहीं छूटना चाहिए। दूसरी ओर, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी रिकॉर्ड की जांच और विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया है। प्रस्तावित मॉक संसद के तीन दिन बाद, १ नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्षी रैली की तैयारी है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने २४ अक्टूबर को रैली की पुष्टि करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी इसमें शामिल होंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाएंगे। इस बीच दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारों के दौरान बाजारों पर संभावित असर का हवाला देकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। यानी चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की विपक्ष की रणनीति के सामने राजधानी के कारोबार और आम लोगों की आवाजाही का सवाल भी खड़ा है।
वोट बचाने की लड़ाई में व्यापार की बलि?
वोटर लिस्ट के सवाल पर सत्ता और चुनाव आयोग को घेरने की तैयारी कर रहे विपक्ष के सामने अब कारोबारियों की चिंता खड़ी हो गई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में १ नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर आयोजन १० नवंबर के बाद कराने की अपील की है। व्यापारियों को आशंका है कि रैली के कारण बैरिकेडिंग, सड़क बंद होने और यातायात में बदलाव से दिवाली के ऐन पहले बाजारों की रफ्तार थम सकती है। अब सवाल है कि क्या लोकतंत्र के लिए विरोध की आवाज और व्यापारियों की रोजी-रोटी के बीच ऐसा रास्ता निकलेगा, जिसमें किसी एक को दूसरे की कीमत न चुकानी पड़े? सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, कश्मीरी गेट और करोल बाग समेत करीब २० प्रमुख थोक एवं खुदरा बाजार हैं। इन बाजारों में धनतेरस और दिवाली से पहले ग्राहकों की भीड़ बढ़ती है। संगठन ने आशंका जताई है कि रैली के दौरान रास्तों पर प्रतिबंध और यातायात में बदलाव से करीब १० हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों की चिंता केवल एक दिन की बिक्री नहीं, बल्कि माल की ढुलाई, बाहर से आने वाले खरीदारों और बाजारों तक पहुंच की भी है। सीटीआई ने इससे पहले अक्टूबर में प्रदर्शनों, सड़क बंद होने और यातायात संबंधी पाबंदियों के कारण दिल्ली के कारोबार को करीब ३ हजार करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा भी किया था। विपक्ष की प्रस्तावित रैली का मकसद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को आगे बढ़ाना है। विपक्ष को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार है। दूसरी ओर, व्यापारियों की यह मांग भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी दौर में ग्राहकों और माल की आवाजाही बाधित न हो।

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