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खुद पर उठे सवालों के बीच छोटे कर्मचारियों पर…मुख्य चुनाव आयुक्त का एक्शन अपनी जवाबदेही कब?

आजमगढ़ में कंप्यूटर ऑपरेटर और पांच बीएलओ पर कार्रवाई के निर्देश; मतदाता सूची की गड़बड़ियों ने फिर खड़े किए ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली/लखनऊ
मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवालों का सामना कर रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग ने अब आजमगढ़ में छह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए मामले में एक कंप्यूटर ऑपरेटर और पांच बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची संबंधी कार्य से तत्काल हटाने तथा उनकी सेवा समाप्ति के संबंध में नोटिस जारी करने को कहा गया है। इस कार्रवाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है; मतदाता सूची तैयार करने और उसकी निगरानी करने वाली पूरी व्यवस्था में खामियां सामने आने पर जवाबदेही केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की ही क्यों तय हो? जिन मुख्य चुनाव आयुक्त के इशारे पर यह सब किया गया, उन पर एफआईआर दर्ज क्यों न की जाए?
अखिलेश यादव ने १५ अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आजमगढ़ की विधानसभा क्षेत्र संख्या ३४७ की मतदाता सूची में विकास यादव नाम की कई प्रविष्टियां होने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि एक ही नाम बार-बार दर्ज किया गया है। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, कर्मचारियों के साथ उनके काम की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। लेकिन अब तक सामने आए कार्रवाई संबंधी निर्देशों में एक कंप्यूटर ऑपरेटर और पांच बीएलओ पर तत्काल कार्रवाई प्रमुख है। बड़े अधिकारियों के विरुद्ध किसी अंतिम दंडात्मक निर्णय की स्पष्ट जानकारी नहीं है।
पीलीभीत में दो एसडीएम हटाए, कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त
आजमगढ़ से पहले पीलीभीत में भी मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर निर्वाचन विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी थी। कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में १६,५५४ प्रविष्टियों से संबंधित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। पार्टी के अनुसार, १३,१५० मतदाताओं के नामों में बदलाव किया गया, ८०४ नाम हटाए गए और लगभग २,६०० नए नाम जोड़े गए। जांच में कुछ मतदाता पहचान पत्र संख्याओं के आधार पर ऑनलाइन खोज करने पर दूसरे व्यक्तियों का विवरण सामने आने की पुष्टि हुई। इसके बाद २२ अक्टूबर को प्रकाशित खबरों के अनुसार, दो एसडीएम को निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों से हटाया गया और मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
गलती कर्मचारियों की या आयोग की?
मतदाता सूची का निर्माण किसी एक कंप्यूटर ऑपरेटर या बीएलओ का व्यक्तिगत काम नहीं है। इसमें निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन तंत्र की निगरानी शामिल होती है।
उत्तर प्रदेश में पहले भी बीएलओ के कामकाज पर सवाल
आजमगढ़ का मामला अकेला नहीं है। जनवरी २०२६ में उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान उन जिलों के बीएलओ की कार्यप्रणाली की जांच की खबर आई थी, जहां प्रदेश के औसत की तुलना में कम नाम हटाए गए थे। उस समय प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से लगभग २.८९ करोड़ नाम हटाए गए थे। इससे यह सवाल उठा था कि बीएलओ के काम की गुणवत्ता का आकलन सही सत्यापन के आधार पर हो रहा है या नाम हटाने की संख्या भी जांच का आधार बन रही है।

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