मुख्यपृष्ठस्तंभलौट आए ‘छुक-छुक’ के दिन

लौट आए ‘छुक-छुक’ के दिन

विमल मिश्र,  मुंबई

संकरे पहाड़ों और गहरी खाइयों के बीच दो फुट के नैरो गेज पर नागिन की तरह बल खाती मिनी हिल ट्रेन की ‘छुक-छुक’ के साथ नैसर्गिक दृश्यावलियों का लुत्फ उठाने की सबसे माकूल जगह है मुंबईवालों का अपना प्राइवेट हिल स्टेशन माथेरान। मॉनसून में चार महीने बंद रहने के बाद यह हिल ट्रेन अब फिर शुरू हो गई है।
पर्वतों के उतुंग शिखर, विहंगम घाटियां व उपत्यकाएं, लाल मिट्टी की सर्पीली पगडंडियां, मस्त विचरते वनचर और जहां देखो फूटते निर्झर व हरित वन-उपवन। सह्याद्रि के संकरे पहाड़ों और पश्चिमी घाट की वादियों में गहरी खाइयों के बीच दो फुट के नैरो गेज पर नागिन की तरह बल खाती, इठलाती और अपनी ‘छुक-छुक’ से निस्तब्ध शांति को भंग करती मिनी हिल ट्रेन से जगमगाती दृश्यावलियों का लुत्फ उठाने का वक्त फिर से आ गया है। मानसून के दौरान चार महीने बंद रहने के बाद माथेरान हिल ट्रेन फिर से शुरू हो गई है।
प्रदूषण रहित शुद्ध पवन के शीतल झकोरे और कदम-कदम पर छिटके मनभावन स्थान। पैनोरमा पाइंट, इको पाइंट, हार्ट पाइंट, सेलिया पाइंट, कियारा पाइंट, सनसेट पाइंट, अलेक्जेंडर पाइंट, मेरी पाइंट, लुइजा पाइंट, मंकी पाइंट, रुस्तमजी पाइंट, लॉर्ड पाइंट, वन ट्री हिल पाइंट, हनीमून हिल व रामबाग पाइंट सरीखे – माथेरान की सैरगाह पर कुल ३८ पाइंट हैं, जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ प्रबल पर्वत और नेरल के साथ आस-पास के इलाकों के ३६० डिग्री नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। २०१४ से टॉय ट्रेन यूनेस्को की प्रस्तावित विश्व विरासत सूची का अंग है। बीबीसी वर्ल्ड ने इसे विश्व की ‘ग्रेट ट्रेन जर्नी सीरीज’ का अंग बनाया है।
१९.९७ किलोमीटर की सर्पीली राह पर चलती खिलौना गाड़ी की कछुआ चाल (१०-१५ किलोमीटर प्रति घंटा) कुछ ऐसी है कि रास्ते के स्टेशनों पर उतरकर वड़ा-पाव खरीदकर खाइए और दौड़कर वापस गाड़ी पकड़ लीजिए। माथेरान का असली आनंद टॉय ट्रेन और २२० घुमावों वाली उसकी दो घंटे की यह यात्रा ही है। माथेरान लाइट रेलवे के रास्ते में १२१ पुल हैं और कई सुरंगें। इनमें एक सुरंग ‘वन किस टनल’ कहलाती है। क्यों, यह आपको किसी प्रेमी युगल से पूछना होगा।
जून से अक्टूबर के बीच नेरल स्टेशन से अमन लॉज सेक्शन के बीच सेवा बंद कर दी जाती है, हालांकि, स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए अमन लॉज और माथेरान के बीच शटल ट्रेनें चलती रहती है। एक वातानुकूलित विस्टाडोम, प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, सैलून कोच और पार्सल वैन मिलाकर कमोबेश २५० मुसाफिर क्षमता छह से आठ डिब्बे। १९८४ में डीजल इंजन आने से पहले ये ट्रेनें केवल भाप के इंजनों से ही चलती थीं, अब डीजल और बिजली चालित भी हो गई हैं।
जारी है १९०७ से सफर
माथेरान रेलवे सबसे अधिक कृतज्ञ है तो धन्नासेठ कारोबारी सर आदमजी पीरभॉय का, जिन्हें माथेरान स्टीम लाइट ट्रॉमवे कंपनी की स्थापना का श्रेय हासिल है। रेल लाइन का निर्माण १९०४ में शुरू हुआ और मार्च, १९०७ में खत्म, जब ट्रेनें शुरू हुर्इं। जब तत्कालीन जीआईपी रेलवे (आज की मध्य रेल) के ताबे में आने से पहले माथेरान रेल १९५२ तक पीरभॉय परिवार के ताबे में रही।
माथेरान हिल रेल के शुरुआती १०० वर्ष के इतिहास में दुर्घटना का एक भी रिकॉर्ड नहीं था, पर बाद में इनका सिलसिला ही चल पड़ा। इसकी शुरुआत हुई २६ जुलाई, २००५ की बारिश से, जब पूरी तरह बह जाने के बाद लाइन को डेढ़ साल बंद रखना पड़ा। अगस्त, २०१९ की बारिशों ने भी कहर ढाया, जब यह लगभग तीन वर्ष बंद रही। बहरहाल, पुनर्निर्माण के बाद हिल रेल अब नए रूप में है। ट्रेन की गति भी बढ़ी है।

अन्य समाचार