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जीवन दर्पण : उत्तम करियर के लिए रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनें

– डॉ. बालकृष्ण मिश्र
विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)
गुरु जी, मेरा करियर कैसा होगा? करियर के विकास में कोई बाधा हो तो कोई उपाय बताएं।
-सचिन गुप्ता
(जन्म: १४ दिसंबर २००२, सायं ६:१०,
प्रयागराज उ.प्र.)
सचिन जी, आपका जन्म शनिवार को हुआ है। आपकी राशि मीन और लग्न मिथुन है। मिथुन लग्न के स्वामी बुध सप्तम भाव में बैठकर लग्न को सप्तम दृष्टि से देख रहे हैं, यह भाग्यशाली होने का संकेत है। सप्तम और दशम भाव के स्वामी बृहस्पति उच्च राशि में होकर धन भाव में बैठे हैं और नवम दृष्टि से दशम भाव को देख रहे हैं। आप अपने पुरुषार्थ से करियर को आगे बढ़ाएंगे। शनि आपकी कुंडली में भाग्य भाव के स्वामी हैं और इस समय शनि की साढ़ेसाती चल रही है। उपाय: शुभ फल के लिए सात शनिवार १०० ग्राम काला तिल, १०० ग्राम काली उड़द, १०० ग्राम बादाम, १०० ग्राम कच्चा कोयला, एक नारियल और आधा मीटर काला कपड़ा सिर से सात बार घुमाकर बहते पानी में प्रवाहित करें। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का ३ बार पाठ करें। जीवन की विशेष गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाएं।
गुरुजी, मेरी राशि क्या है और मेरा करियर कैसा होगा?
-सौरव घोषाल
(जन्म: १२ मई २००३, सायं ६:२०,
उल्हासनगर-महाराष्ट्र)
सौरव जी, आपका जन्म सोमवार को हुआ है, राशि कन्या है। दशम भाव के स्वामी चंद्रमा का द्वादश भाव में बैठना मन की एकाग्रता में कमी और कन्फ्यूजन ला रहा है। द्वितीय भाव में केतु और अष्टम में राहु है। धन और सप्तम भाव के स्वामी मंगल उच्च राशि में चतुर्थ भाव में हैं, आप अपने पुरुषार्थ से करियर बनाएंगे।
वर्तमान में राहु महादशा में गुरु का अंतर चल रहा है। पराक्रमेश गुरु उच्च राशि में दशम भाव में बैठकर जीवन में परिवर्तन और विकास कराएंगे। उपाय: प्रतिदिन यूट्यूब पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनें।
गुरुजी करियर में ग्रोथ नहीं हो रही है।
-सत्यम मिश्रा
(जन्म: २२ फरवरी १९९७, प्रात: ५:३०, भदोही, उ.प्र.)
सत्यम जी, जन्म शनिवार को हुआ है, राशि सिंह है। लग्न मकर है। मकर लग्न में बृहस्पति नीच राशि में होकर द्वादश भाव के स्वामी के रूप में लग्न में बैठे हैं, जिससे कभी-कभी आत्मबल कमजोर होता है। परन्तु बृहस्पति की पंचम दृष्टि पंचम भाव पर, सप्तम दृष्टि सप्तम भाव पर और नवम दृष्टि भाग्य भाव पर है, आप बुद्धिमान और व्यापारिक बुद्धि वाले हैं, भविष्य में व्यापार करेंगे। पराक्रम भाव में केतु और भाग्य भाव में मंगल-राहु की युति से भाग्य ग्रहण दोष बन रहा है, जिससे उतार-चढ़ाव है। अष्टम में चंद्रमा है। मन को एकाग्र करके काम करें, तभी सफलता मिलेगी।

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