मुख्यपृष्ठस्तंभप्रेम की पंचायत : शंका के फेर में मत पड़ो...

प्रेम की पंचायत : शंका के फेर में मत पड़ो…

-पं. प्रेमानंद शास्त्री (मणिकर्णिका घाट वाले)
हर-हर महादेव! मणिकर्णिका घाट की पावन भस्म और गंगा की लहरों के बीच फिर सज चुकी है हमारे इश्क की साप्ताहिक विशेष ओपीडी। जब आशिकों के दिल में तूफान और दिमाग में शॉर्ट-सर्किट हो रहा हो, तो समझो पंडित प्रेमानंद शास्त्री की शरण में आने का समय आ गया है। आइए, देखते हैं आज के दो नए मजनू अपनी कौन सी अनूठी उलझन लेकर आए हैं!
‘पंडित जी, हमारी महबूबा सोशल मीडिया पर ‘सिंगल’ स्टेटस रखती है, जबकि हमारी सात जन्मों की पक्की बुकिंग हो चुकी है। दिल बैठा जा रहा है, क्या करें?’
– सुरेश, दादर
वत्स सुरेश! तुम उस नासमझ व्यापारी की तरह हो, जो माल बेच चुका है पर बही-खाते में एंट्री कराने के लिए रो रहा है! प्राचीन आचार्यों का वचन है, ‘लोभात् क्रोध: प्रभवति लोभात् काम: प्रजायते।’ यानी दिखावे के लालच और शंका के फेर में मत पड़ो। यदि वह दिल से तुम्हारी है, तो डिजिटल दुनिया के चार कागजी अक्षरों से क्या फर्क पड़ता है? सोशल मीडिया के छलावों से बाहर निकलो, रिश्ते की नींव भरोसे पर टिकी है, लाइक्स पर नहीं!
‘महाराज, जब भी हम अपनी होने वाली पत्नी से मिलने जाते हैं, उनकी मम्मी (भावी सास) साथ ही चिपकी रहती हैं। अकेले में बतियाने का मौका ही नहीं मिलता, उपाय बताएं!’
– महेश, कल्याण
हे संकटग्रस्त महेश! तुम उस शिकारी की तरह हो जो शिकार सामने पाकर भी तीर चलाने से महरूम है! हर काम के लिए धीरज और सही वक्त का इंतजार करना पड़ता है। कहावत है, ‘जैसी बहे पीठ तब तैसी दीजे फेर!’ माताजी का साया रहना कोई आपदा नहीं, बल्कि तुम्हारी परीक्षा की घड़ी है। सास जी का दिल जीतो, उन्हें अपनी बातों से रिझाओ। उनका विश्वास जीत लोगे, तो रास्ते अपने आप खुल जाएंगे!
पंडित जी का महाज्ञान
‘धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।’ अर्थात, हर चीज का एक वक्त होता है, उतावलेपन से बना-बनाया खेल बिगड़ जाता है!
वैधानिक चेतावनी
पंडित प्रेमानंद शास्त्री (मणिकर्णिका घाट वाले) द्वारा प्रदत्त यह तात्विक ज्ञान विशुद्ध हास्य और लोक-व्यवहार पर आधारित है। इसे अपने विवेक पर ही अमल में लाएं। यदि सोशल मीडिया स्टेटस पर टोकने से प्रेमिका ब्लॉक कर दे या सास जी से बात करते-करते दाल गलने के बजाय घर से बाहर निकाल दिए जाएं, तो इसके लिए पंडित जी और प्रकाशन संस्था उत्तरदायी नहीं होंगे!

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