मुख्यपृष्ठस्तंभ‘भूतों’ की यह रात!

‘भूतों’ की यह रात!

सारी दुनिया के साथ मुंबई ने भी कल ‘वर्ल्ड हैलोवीन डे’ मनाया। कैसी रही ‘भूतों’ की यह रात!
‘वर्ल्ड हैलोवीन डे’ यानी हैलोवीन थीम पार्टीज का दिन। भुतहा मेकअप और डरावनी वेश-भूषा पहिनो, डरो -डराओ, डरावने गेम खेलो, बच्चों को चॉकलेट बांटो और जमकर पार्टीबाजी करो। बाकी दुनिया के साथ हम मुंबईकरों ने भी कल (३१ अक्टूबर) को यह दिन मनाया।
होटलों, रेस्त्रां और गेम जोन की हैलोवीन पार्टियां शबाब पर थीं और भूत-प्रेत के किस्सों के लिए मशहूर होटल ताजमहल, हैंगिंग गार्डन, टॉवर ऑफ साइलेंस, आरे कॉलोनी, नेशनल पार्क, हाई कोर्ट, जे. जे. अस्पताल और आकाशवाणी जैसी मुंबई की मशहूर जगहें आयोजनों का मुख्य केंद्र। जहां देखो टैटू, मास्क, डेविल विग, अक्सेसरीज, नकली खून, मांस, घाव, हड्डी, घाव, लंबे नाखूनों से लैस भूत, पिशाच, चुड़ैल, राक्षस, शैतान, ग्रीम रीपर, मोंस्टर, ममी, कंकाल, वैम्पायर, करामाती, वेयरवोल्फ, चमगादड़, जोकर, मकड़ी के जाले और प्राप्स। ‘‌रिप’ व ‘बू’ जैसे मैसेज के साथ भुतहा डेकोर और दस्तरख्वान पर सजे ‘ड्रैकुला विंग्स’, ‘ड्रैकुलाज ब्लड’, ‘डेविल्स फ्राई ’, ‘डेविल्ड एग्स’, ‘मांस्टर माउथ’, ‘ब्लड जेली’, ‘आईबॉल ब्रू’, ‘स्पाइडर्स आई ग्रॉग’, ‘घोस्ट कप केक्स’, ‘ब्लडेड करीड पंपकिन सैलड’, ‘ब्लड शॉट आईबॉल स्ट्यू’, ‘ग्रेवयार्ड लैसाग्ना’, ‘स्पूकी चिली चीज टोस्ट फिंगर्स’, ‘ड्रंकन स्पाइडर्स’, ‘चुड़ैल ब्रेन मसाला’, ‘पंपकिन घोस्ट्स’, जैसे नामधारी व्यंजन।
समुद्र पर नौकाओं की भुतहा सैर और ‘घोस्ट वॉक्स’ आयोजित किए गए। कास्ट्यूम कांटेस्ट, कास्ट्यूम परेड, थीम पार्टीज, ‘स्पूकी ड्रिंक्स’, ‘पैरानॉर्मल एनकाउंटर्स’ और ‘बीअर चुग्गेथान’ व ‘भूत चैलेंज’ जैसे इवेंट्स हुए। सड़क पर स्पूकी भूषा में विचर रहे थे साइकिलिस्ट्स। दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर ‘एप्पल बोबिंग’ जैसे गेम खेले और हॉरर व जॉंबी मूवीज देखी गर्इं। आउटहोर वैंâप फॉयर के गिर्द हॉरर कहानियां और डरावनी आपबीतियां कही और सुनाई गर्इं। मुंबई में विक्कन समुदाय के लोगों और शॉक देने वाले लाइटर्स से लेकर तरह-तरह के भयानक मुखौटे व नकाबें, प्लास्टिक के सांप, खून भरे मुंह का आभास दिलाने वाले च्यू‌इंग गम, नकली मितली और अपने-आप चलने वाले कटे हुए हाथ तक बेचने वाली बांद्रा की हॉरर शॉप ‘स्पार्कल’ के लिए साल का सबसे बड़ा दिन यही था।
क्या है हैलोवीन?
हर साल ३१ अक्टूबर को ही मनाया जाने वाला हैलोवीन मूलत: ईसाई त्योहार है – १ नवंबर को मनाए जाने वाले पश्चिमी ईसाई पर्व ‘ऑल हैलोज डे’ (आत्माओं का दिवस) की पूर्व संध्या। हैलोवीन को ‘ऑल हैलोस ईव’, ‘ऑल हैलोस इवनिंग’, ‘ऑल हैलोवीन’ और ‘ऑल सेंट्स ईव’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पर मृतकों की आत्माएं धरती पर प्रकट हो कर जीवित आत्माओं के लिए परेशानी पैदा करती हैं। भूतों जैसे वेश इन दुरात्माओं का डर भगाने और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए ही धारण किए जाते हैं। इन दुरात्माओं को भगाने के लिए हर जगह आग जलाकर उसमें मरे हुए जानवरों की हड्डियां फेंकी जाती हैं। हैलोवीन पर ‘जैक ओ लैंटर्न’ बनाते हैं। कद्दू को खोखला करके उसमें आंख, नाक और मुंह बनाकर भीतर मोमबत्ती जलाते हैं, जिसे घर के बाहर या फिर पेड़ों पर लटकाने के बाद दफना दिया जाता है। अमेरिका में बच्चे कद्दू जैसे आकार का बैग लेकर पड़ोसियों और संबधियों के घर में जाकर बोलते है ‘ट्रिक ऐंड ट्रीट’ और बदले में चॉकलेट की भेंट लेकर लौटते हैं।
हैलोवीन डे पर हैलोवीन थीम के आकार का केक व कैंडी , नॉवेल्टी कैंडी के आकार जैसे खोपड़ी, कद्दू, चमगादड़ और कीड़े, आदि बनाना शगुन है। कद्दू पाई, कद्दू ब्रेड, पॉपकॉर्न, पौंड केक, कद्दू प्यूरी के साथ भरा हुआ रामेकिन्स, भुने हुए कद्दू के बीज, स्वीट कॉर्न और आत्माओं के शेप वाले केक आदि भी।
भूत दिखाओ, इनाम पाओ
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संगठक प्रोफेसर श्याम मानव इस तरह के आयोजनों को फिजूल बताते हैं। उनके साथ विद्यार्थी भारत, ‘घोस्ट एनकाउंटर्स’, ‘ओपन माइक’ और ‘स्केयर कॉन’ जैसे संगठनों ने भी अंधश्रद्धा दूर करने के लिए बीड़ा उठाया है। हैलोवीन डे अब अपने देश में भी जोर पकड़ रहा है। कुछ संस्थाएं तो डेमनोलजी, स्पिरिट हीलिंग, ट्रांसपर्सनल रिग्रेशन, घोस्ट टूर गाइडेंस और प्रफेशनल पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेशन जैसे कोर्स भी कराती हैं। सुना है काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ‘भूत विद्या’ की डिग्री भी दी जाती हैं।

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