मुख्यपृष्ठनए समाचारटोरेंट के बचाव में उतरी समिति फडणवीस सरकार के दावे कटघरे में!

टोरेंट के बचाव में उतरी समिति फडणवीस सरकार के दावे कटघरे में!

-ग्रामीण महाराष्ट्र में लोडशेडिंग का दावा
-३० हजार करोड़ की परियोजना पर पर्यावरणीय सवाल बरकरार
सामना संवाददाता / मुंबई
रायगड जिले के कर्जत तालुका के सायडोंगर में प्रस्तावित टोरेंट पावर की पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजना को लेकर सियासी और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। परियोजना के समर्थन में उतरी टोरेंट परियोजना बचाव समिति के अध्यक्ष अजय सिंह सेंगर ने पत्रकार परिषद में ३० हजार करोड़ रुपये के निवेश और करीब ३ हजार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार का दावा किया, लेकिन परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बताने के दावों के बीच विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
सेंगर ने दावा किया कि मुंबई को छोड़कर महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सप्ताह में एक-दो दिन बिजली कटौती होती है और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को भी बिजली संकट झेलना पड़ता है। उनके इस बयान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार के महाराष्ट्र को लोडशेडिंग मुक्त रखने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है, तो ग्रामीण इलाकों में कटौती की नौबत क्यों आ रही है?
समिति ने परियोजना के लिए २३३ हेक्टेयर वनभूमि के बदले २५३ हेक्टेयर निजी जमीन वन विभाग को देने और करीब ९० हजार पेड़ लगाने की योजना का हवाला देकर इसे हरित ऊर्जा परियोजना बताया। हालांकि, पत्रकार परिषद में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, भूगर्भीय अध्ययन और जलस्रोतों पर संभावित असर की विस्तृत रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई।
सेंगर के मुताबिक, अतिरिक्त बिजली से पानी ऊपरी जलाशय में पहुंचाकर जरूरत के समय टर्बाइन से बिजली बनाई जाएगी। इसे उन्होंने ‘पानी की बैटरी’ बताया। वहीं, परियोजना के विरोध में २ नवंबर को कर्जत बंद का आह्वान किया गया है। सेंगर ने विरोध को राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताते हुए इसका विरोध करने की बात कही।

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