-अर्जुन मिश्रा
जालंधर में एचएमवी कॉलेज के पास स्थित ग्लासी जंक्शन होटल पर पुलिस की छापेमारी के दौरान कर्मचारियों के कथित तौर पर भाग निकलने का मामला सामने आया है। स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई के समय होटल में मौजूद कर्मचारियों ने वहां से निकलने की कोशिश की। अब आबकारी विभाग से होटल के शराब लाइसेंस की जांच कराने की बात सामने आई है। हालांकि, जांच में क्या अनियमितता मिली और कर्मचारियों के भागने का वास्तविक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। होटल के संचालन और शराब बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल मामला इतना दिलचस्प जरूर है कि पुलिस मेहमान बनकर नहीं, जांच करने पहुंची और कथित तौर पर स्टाफ ने स्वागत करने के बजाय विदाई लेना बेहतर समझा!
हरियाणा में लोकतंत्र बचाने निकली भाजपा, दिल्ली में विपक्ष भी उसी काम पर!
हरियाणा के रोहतक में रविवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व किया। दिलचस्प संयोग यह रहा कि इसी दिन दिल्ली में विपक्षी इंडिया गठबंधन ने भी लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के नाम पर ‘चलो दिल्ली’ कार्यक्रम आयोजित किया। भाजपा ने कांग्रेस और विपक्ष पर जनमत का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्ष लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रहे हैं, लेकिन खतरे की उनकी परिभाषाएं बिल्कुल अलग हैं। अब जनता के सामने भी अजीब पहेली है, एक दल कहता है लोकतंत्र को विपक्ष से बचाओ, दूसरा कहता है सत्ता से बचाओ। बेचारा लोकतंत्र सोच रहा होगा, मेरी रक्षा के लिए इतनी भीड़ है तो मुझे खतरा आखिर किससे है!
जालंधर में नगर कीर्तन के पोस्टर फाड़ने का आरोप, युवक पुलिस की गिरफ्त में!
पंजाब के जालंधर के सेंट्रल टाउन इलाके में नगर कीर्तन से जुड़े पोस्टर कथित तौर पर फाड़ने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। रविवार सुबह सामने आई स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टरों को नुकसान पहुंचाने की घटना के बाद शिकायत की गई और पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि, पोस्टर फाड़ने के पीछे युवक का वास्तविक उद्देश्य क्या था और घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, यह जांच से स्पष्ट होगा। धार्मिक आयोजन से जुड़े पोस्टरों के मामले में स्थानीय संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पोस्टर किसने लगाए, किसने फाड़े और क्यों फाड़े-इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। फिलहाल एक बात साफ है कि दीवार पर लगे कागज का विवाद थाने की फाइल तक पहुंच गया।
