मुख्यपृष्ठनए समाचारपटाखा स्टॉलों को मंजूरी देकर हादसों को न्योता दे रही मनपा!

पटाखा स्टॉलों को मंजूरी देकर हादसों को न्योता दे रही मनपा!

-अस्पताल के सामने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में खुलेंगी पटाखों की दुकानें
-सुरक्षा नियमों की अनदेखी, दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
सुरेश गोलानी / मुंबई
दीपावली के मद्देनजर मीरा-भायंदर महानगरपालिका में २६ अक्टूबर को महापौर डिंपल मेहता की अध्यक्षता में पटाखों की बिक्री हेतु जगह निश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित विशेष बैठक में लिया गया निर्णय गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। सरकार, न्यायालय और विस्फोटक अधिनियम के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि रिहायशी इलाकों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और अस्पतालों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास पटाखों की बिक्री नहीं की जा सकती, लेकिन सत्ताधारी भाजपा और मनपा प्रशासन द्वारा शहर में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मनपा द्वारा जारी आधिकारिक सूची के मुताबिक, शहर के विभिन्न इलाकों में कुल २२ खुली जगहों पर पटाखा स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है। इसमें सबसे अधिक १४ जगहें नवघर पुलिस स्टेशन की सीमा में हैं, जबकि कनकिया में ३, भायंदर में ३, काशीगांव में १ और नयानगर में १ जगह शामिल की गई है। इनमें सबसे चौंकाने वाला पैâसला भायंदर-पश्चिम स्थित पंडित भीमसेन जोशी सरकारी अस्पताल के ठीक सामने ‘अग्रवाल मैदान’ में स्टॉल लगाने की मंजूरी देना है। अस्पताल जैसे साइलेंस जोन के ठीक सामने ज्वलनशील पटाखों की दुकानें खोलने की अनुमति देना सुरक्षा मानकों और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का गंभीर उल्लंघन है। इसके अलावा, नियमों को ताक पर रखकर मीरा रोड में मच्छी मार्केट के ठीक बाहर भी १० से १२ स्टॉल एक-दूसरे से सटाकर लगाए जा रहे हैं। विस्फोटक नियमों के अनुसार दो स्टॉलों के बीच कम से कम ३ मीटर और रिहायशी इमारतों व अस्पतालों से न्यूनतम ५० मीटर की दूरी होनी चाहिए। साथ ही एक अस्थाई स्टॉल में अधिकतम ५० किलो से ज्यादा पटाखा रखने की अनुमति नहीं है।
नियमों के बिल्कुल विपरीत, शहर में अधिकांश पटाखा स्टॉल भीड़-भाड़ वाली मुख्य सड़कों, संकरी गलियों और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों के बीच लगाने की तैयारियां जोरों पर हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होगा और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि यह स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी एक बेहद गंभीर खतरा बन सकता है। इस प्रशासनिक लापरवाही के बीच एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मनपा द्वारा तय की गई आधिकारिक सूची के अलावा भी शहर के कई अन्य संवेदनशील और रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से धड़ल्ले से पटाखा स्टॉल लगाए जा रहे हैं। जागरूक नागरिकों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण नियमों को ताक पर रखकर ये अनुमतियां दी गई हैं और अवैध स्टॉलों पर भी आंखें मूंद ली गई हैं। यदि कोई बड़ी आगजनी या दुर्घटना होती है, तो अस्पताल के मरीजों और घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी? सजग नागरिकों ने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले इन स्टॉलों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाएं और अवैध रूप से चल रही दुकानों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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