मुख्यपृष्ठधर्म विशेषधनतेरस : आरोग्य, समृद्धि और यमदीपदान का पर्व

धनतेरस : आरोग्य, समृद्धि और यमदीपदान का पर्व

-शीतल अवस्थी

धनतेरस को केवल खरीदारी का दिन मानना अधूरा है। यह भगवान धन्वंतरि के माध्यम से स्वास्थ्य तथा यमदीपदान के माध्यम से जीवन की नश्वरता का स्मरण कराता है।
६ नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार भगवान धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन आयुर्वेद और आरोग्य से जुड़ा है। शाम को माता लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा तथा घर के बाहर यम के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है।
पूजा में स्वच्छ चौकी पर दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि से स्वास्थ्य, माता लक्ष्मी से सदुपयोगी समृद्धि और कुबेर से धन के विवेकपूर्ण संरक्षण की प्रार्थना करें। ‘ॐ धन्वन्तरये नमः’ मंत्र का जप किया जा सकता है। यमदीप घर के मुख्य द्वार से सुरक्षित दूरी पर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है।
सोना, चांदी अथवा बर्तन खरीदना परंपरा है, अनिवार्यता नहीं। कर्ज लेकर दिखावटी खरीदारी करना पर्व के मूल भाव के विपरीत है। इस दिन स्वास्थ्य जांच कराना, घर की औषधि पेटी की समीक्षा करना अथवा परिवार की स्वास्थ्य बीमा योजना को समझना भी आधुनिक धन्वंतरि पूजन का रूप माना जा सकता है।
धनतेरस सिखाती है कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है और संपत्ति का मूल्य उसके धर्मसम्मत उपयोग में है। खरीदारी से पहले आवश्यकता, गुणवत्ता और बजट की जांच करें; तभी उत्सव आर्थिक दबाव नहीं, वास्तविक समृद्धि का माध्यम बनेगा।
धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं; स्वास्थ्य संबंधी मामलों में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

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