बंगाल री झालमुड़ी मीठी लागी, दिल्ली री झालमुड़ी में मिर्ची क्यूं लाग गी?
अरे म्हारा मोदी सा, ई काई गजब कर रिया हो थे?
बंगाल में झालमुड़ी वाला दिख्यो तो गाड़ी रोक दी। झालमुड़ी खाई, फोटो खिंचवाई, वीडियो बनवायो अर देश भर में वाहवाही लूट ली। म्हाने भी लाग्यो, वाह रे मोदी सा! गरीब रे धंधे सूं कितरो प्रेम है!
पण अब दिल्ली में राहुल गांधी री रैली में झालमुड़ी, चना, चाट, चाय अर जूस वालां रो धंधो चमक गयो तो थारे समर्थकां नै मिर्ची क्यूं लाग री है?
अरे भाई सा, कोई २०० किलो संतरे रो जूस बेच गयो, कोई २० लीटर दूध री चाय खपा गयो। चना अर झालमुड़ी वालां री भी चांदी हो गी!
पण इधर गरीब री जेब में चार पैसा आयो, उधर ११ हजार करोड़ रुपया रे नुकसान रो ढोल बजण लाग गयो!
अरे म्हारा भाई, ई हिसाब है के ऊंट री पूंछ?
व्यापारी संगठन कहवे है कि रैली सूं दिल्ली रो ११ हजार करोड़ रो व्यापार चौपट हो गयो!
पण जिण बाजारां रो हिसाब गिणायो जा रियो है, उणमें कई बाजार तो रविवार नै वैसे भी बंद रहवे है!
अब बताओ सा, रविवार री छुट्टी रो नुकसान भी राहुल गांधी रे माथे मढ़ दोगा के?
कनॉट प्लेस में ग्राहक कम आया, तो नुकसान! रामलीला मैदान रे आसपास ग्राहक घणा आया, तो ऊ कमाई हिसाब में क्यूं कोनी?
अर सुनो मोदी सा!
राहुल गांधी ने लोगां नै छोटा दुकानदारां सूं खरीदारी करण री अपील करी। लोगां ने चाय पी, चना खायो, झालमुड़ी खाई अर गरीब रे घर में चार पैसा पहुंचाया।
अब ई बताओ, बंगाल में थां झालमुड़ी खाओ तो गरीब कल्याण, अर दिल्ली में राहुल री रैली वाला झालमुड़ी खावै तो व्यापार रो सत्यानाश?
वाह सा वाह! गजब रो गणित है!
लगै है झालमुड़ी रो स्वाद कोनी बदल्यो, बस खावण वाला अर खिलावण वाला बदल गयो!
मोदी सा, गरीब तो गरीब है। ऊ बंगाल रो होवै या दिल्ली रो। ऊ थारी रैली में झालमुड़ी बेचे या राहुल री रैली में, उणने तो दो जून री रोटी कमाणी है।
पण थारी राजनीति में तो अजब हिसाब चालै है!
अपणी रैली में भीड़ आवै तो अर्थव्यवस्था मजबूत, दूसरां री रैली में भीड़ आवै तो व्यापार चौपट!
अर आखिर में एक बात म्हारी भी सुण ल्यो, मोदी सा!
झालमुड़ी सूं इतरो ही प्यार है, तो झालमुड़ी वालां रो धंधो चालण दो। गरीब री कमाई पर राजनीति री मिर्ची मत छिड़को!
बाकी म्हारे राजस्थान में तो कहावत है,
जैसी करनी, वैसी भरनी! अर जैसी झालमुड़ी, वैसी चटणी!
पण थारे राज में तो लागै है झालमुड़ी भी अब पार्टी पूछकै बिकसी!
