मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : खाकी के भीतर खलबली!

दिल्ली लाइव : खाकी के भीतर खलबली!

अरुण कुमार गुप्ता

राजधानी की कानून-व्यवस्था संभालने वाली दिल्ली पुलिस के भीतर ही असंतोष की आवाज बुलंद होने लगी है। जिन कंधों पर अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही पुलिसकर्मी अब अपनी शिकायतों को लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए। करीब १५० पुलिसकर्मियों के इस विरोध प्रदर्शन ने महकमे की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीपी और एसएचओ के तबादलों से शुरू हुआ विवाद अब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया है। सवाल यह है कि जब खाकी के भीतर ही असंतोष सुलग रहा है, तो जवानों की फरियाद आखिर कौन सुनेगा? दिल्ली पुलिस में अंदरूनी असंतोष का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। करीब १५० पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। बताया जा रहा है कि तबादलों को लेकर पुलिसकर्मियों में असंतोष है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के सामने पांच मांगें रखीं। इस विवाद में शाहदरा थाने से जुड़ा मामला भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने वकीलों के खिलाफ कार्रवाई और तबादला आदेश वापस लेने की मांग उठाई है। हालांकि, पूरे विवाद की परिस्थितियों और सभी मांगों का आधिकारिक विवरण सामने आना अभी जरूरी है। इस घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस विभाग में तबादले प्रशासनिक जरूरतों के तहत होते हैं, लेकिन यदि इन फैसलों को लेकर कर्मचारियों में असंतोष पैदा होता है तो शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी उतनी ही पारदर्शी होनी चाहिए। पुलिसकर्मियों का काम आम नागरिकों की शिकायतें सुनना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में उनकी अपनी शिकायतें यदि प्रदर्शन के रूप में सामने आती हैं, तो यह विभागीय संवाद और प्रशासनिक जवाबदेही पर विचार करने का विषय बन जाता है।
कुर्सी बचाने से पहले वोटर का हक बचाओ!
सत्ता की कुर्सी किसके पास रहेगी, यह फैसला जनता करती है, लेकिन जनता किसे वोट देगी, यह तय करने का अधिकार किसी संस्था को नहीं है! मतदाता सूची से नाम हटने और एसआईआर की प्रक्रिया पर उठते सवालों ने चुनाव आयोग को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है। दिल्ली के रामलीला मैदान से राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। विपक्ष का सवाल साफ है। जब मतदाता का वोट ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र की निष्पक्षता की गारंटी कौन देगा? दिल्ली के रामलीला मैदान में १ नवंबर को आयोजित इंडिया गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। ममता बनर्जी ने भी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और हर पात्र नागरिक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। विपक्ष का सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में कितने लोग वास्तव में अपात्र थे और कितने पात्र नागरिक प्रशासनिक या तकनीकी गड़बड़ियों के कारण अपने मतदान अधिकार से वंचित हुए? नाम हटाने के कारण, नोटिस की प्रक्रिया और अपीलों के निपटारे का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

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