मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : जदयू को हराया, बीजेपी ने गले लगाया!

पटना की पॉलिटिक्स : जदयू को हराया, बीजेपी ने गले लगाया!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू के बीच बढ़ती तल्खी अब खुलकर सामने आने लगी है। विधान परिषद चुनाव में जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराकर निर्दलीय एमएलसी बने राहुल राज की भाजपा में वापसी ने ग’बंधन के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जवाब मांगा है। उमेश कुशवाहा ने सवाल उ’ाया कि भाजपा ने हाल ही में अनुशासनहीनता के आरोप में राहुल राज को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। फिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति पैदा हो गई कि महज १५ दिनों के भीतर उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल करने की नौबत आ गई? उन्होंने कहा कि भाजपा किसे निकालती है और किसे शामिल करती है, यह उसका अंदरूनी मामला है, लेकिन इतनी जल्दी फैसले में बदलाव के पीछे की वजह पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना चाहिए। दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राहुल राज ने एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को पराजित किया था। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को हराया। चुनाव में जदयू को शिकस्त देने वाले इन दोनों नेताओं का भाजपा के साथ जुड़ाव ग’बंधन की राजनीति में असहज सवाल खड़े कर रहा है।
बिहार एनडीए में महाभारत!
बिहार में एनडीए की एकजुटता का मुखौटा उतरने लगा है। विधानसभा चुनाव के बाद ग’बंधन के भीतर राजनीतिक ताकत और वर्चस्व को लेकर खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा और जदयू भले ही सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता का दावा करें, लेकिन विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने दोनों दलों के रिश्तों में खटास उजागर कर दी है। जदयू के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि उसके उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में हार का सामना करना पड़ा और निर्दलीय जीतने वाले नेताओं के साथ भाजपा की नजदीकी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी।एमएलसी चुनाव में हार, निर्दलीय विजेताओं को भाजपा का समर्थन और जदयू उम्मीदवारों की शिकस्त ने ग’बंधन की अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। नीतीश कुमार की पार्टी ने ५ नवंबर को हाईलेवल बै’क बुलाकर भाजपा के सामने अपनी नाराजगी का हिसाब खोलने की तैयारी कर ली है। सवाल है कि क्या बिहार एनडीए में भाजपा के बढ़ते दबदबे से जदयू का धैर्य जवाब देने लगा है? मामला बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज से जुड़ा है। दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने जदयू समर्थित उम्मीदवारों को शिकस्त दी। इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ उनकी तस्वीर सामने आने और भाजपा से उनके जुड़ाव की खबरों ने जदयू की बेचैनी बढ़ा दी। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए। पार्टी के भीतर यह सवाल उ’ रहा है कि जब चुनाव में ग’बंधन के उम्मीदवार मैदान में थे, तब सहयोगी दलों की भूमिका कितनी ईमानदार रही?५ नवंबर की हाईलेवल बै’क को इसी नाराजगी के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
तेजस्वी ने भाजपा के खिलाफ फूंका बिगुल!
निर्दलीय बनकर चुनाव जीतो और फिर भाजपा का दामन थाम लो! बिहार में इसी सियासी घटनाक्रम ने विपक्ष को भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की सदस्यता रद्द करने की मांग उ’ाकर भाजपा को सीधे संवैधानिक चुनौती दी है। तेजस्वी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन बताते हुए भाजपा पर संविधान का मजाक बनाने का आरोप लगाया है। अब यह लड़ाई सिर्फ दो एमएलसी की सदस्यता तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार में सियासी नैतिकता और संवैधानिक जवाबदेही का सवाल बन गई है। बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद भाजपा के सामने खड़ा हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। दोनों ने चुनाव में जदयू उम्मीदवारों को हराया। इसके बाद ३१ अक्टूबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में दोनों ने भाजपा से जुड़ने की घोषणा की। उनकी भाजपा की सदस्यता पर्चियों और पार्टी के गमछे के साथ तस्वीरें भी सामने आईं। इस घटनाक्रम पर तेजस्वी यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों एमएलसी को अयोग्य घोषित करने की मांग की।

 

अन्य समाचार