सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा द्वारा आयोजित `संविधान बचाओ मोर्चा’ की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता में बैठी पार्टी आखिर मोर्चा कैसे निकाल सकती है? उन्होंने कहा कि केवल सत्ता मिलने या उस पर बैठने से काम नहीं चलता, बल्कि वह रग-रग और खून में होनी चाहिए। भाजपा अभी भी विरोधी दल की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है।
ख्यातनाम कार्टूनिस्ट आलोक द्वारा पु. ल. देशपांडे के साहित्य पर बनाए गए `पु. ल. देशपांडे कैलेंडर २०२७’ के विमोचन के दौरान राज ठाकरे ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर बेबाक राय रखी। पिछले दस-बारह सालों से यह चलन शुरू हुआ है कि शासकों के खिलाफ कार्टून न बनाए जाएं और पत्रकार उनके खिलाफ न लिखें, जिसे उन्होंने बेहद गलत बताया। उन्होंने हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे द्वारा पंडित नेहरू को भेजे गए कार्टून और उस पर नेहरू की शुभकामनाओं का हवाला देते हुए कहा कि आज चित्रकारों और पत्रकारों की बात सुनने या उनकी सराहना करने की संस्कृति लगभग समाप्त हो गई है।
राजनीतिक दलों पर टिप्पणी
कांग्रेस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रभावी विपक्ष कैसा होना चाहिए, यह कांग्रेस को लंबे समय तक समझ नहीं आया, हालांकि पिछले पांच वर्षों से उसे थोड़ा बहुत समझ आने लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विधान परिषद चुनावों को लेकर सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि सत्तासीन लोग ऐसी छोटी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देते। नेहरू, इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव या मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं देखा गया। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को यह समझना चाहिए कि वे किस पद पर हैं और उनका व्यवहार वैâसा होना चाहिए।
