-एक तरफ चुनावी अभियान, दूसरी तरफ नाबालिग के यौन शोषण की जांच; अब्दुल्ला शाहिद प्रकरण में कई सवालों के जवाब बाकी
एस. आसिफ
दो नवंबर की रात। मालदीव के हुलहुमाले में पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के आवास पर पुलिस पहुंची। रात नौ बजकर उनसठ मिनट पर अदालत के वारंट के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया। कुछ समय पहले तक शाहिद सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ फैल रहे आरोपों को झूठा बता रहे थे। अब वही नेता नाबालिग के कथित यौन शोषण की जांच में हिरासत में था, जो वर्ष २०२८ के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने में जुटा था।
आरोप सामने आए कैसे?
इस कहानी की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अभी सार्वजनिक नहीं है। शिकायत कब दर्ज हुई, पुलिस को शुरुआती सूचना कैसे मिली और गिरफ्तारी का आधार बने साक्ष्य क्या हैं- इनका विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। पुलिस ने पुष्टि की है कि मामला अठारह वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे अतिरिक्त विवरणों को जांच का स्थापित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी।
गिरफ्तारी से पहले सफाई
शाहिद ने अपने खिलाफ प्रसारित दावों को बेबुनियाद और राजनीतिक उद्देश्य से चरित्र हनन की कोशिश बताया। लोगों से अपुष्ट बातें नहीं पैâलाने की अपील भी की। लेकिन अदालत का वारंट आने के बाद मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें पहले हुलहुमाले पुलिस स्टेशन और फिर धूनीधू हिरासत केंद्र ले जाया गया।
बड़ी पहचान, गंभीर जांच
वर्ष १९८४ में विदेश मंत्रालय से सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले शाहिद संसद के अध्यक्ष और दो बार विदेश मंत्री रहे। सितंबर २०२१ से सितंबर २०२२ तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता की। अगस्त २०२६ में एमडीपी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वह राष्ट्रपति पद की पार्टी उम्मीदवारी के अभियान में थे।
अब किन कड़ियों की पड़ताल जरूरी?
जांच की दिशा समझने के लिए शिकायत और कथित घटनाओं की समयरेखा, उपलब्ध साक्ष्य तथा अदालत में पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे। शाहिद के राजनीतिक साजिश के दावे का आधार भी जांचा जाना बाकी है। शिकायतकर्ता की पहचान और सुरक्षा बनाए रखते हुए इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है।
फिलहाल गिरफ्तारी प्रमाणित है, आरोपों की सत्यता का न्यायिक निर्धारण बाकी। इस कहानी का अगला निर्णायक अध्याय चुनावी मंच से नहीं, जांच और अदालत के रिकॉर्ड से सामने आएगा।
