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संपादकीय :  पटाखे अमेरिका में; धुआं भारत में!

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को उनकी औकात दिखा दी है। मतदाताओं द्वारा दिया गया झटका इतना जोरदार है कि सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी पर सीनेट और `हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ दोनों सदनों में बहुमत खोने की नौबत आ गई है। इन दोनों जगहों पर अब विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा रहने वाला है। स्वाभाविक रूप से हर स्तर पर ट्रंप को घेरने का प्रयास होगा। पूर्वार्ध में इन महाशय ने बेहिसाब फैसले लिए। बेलगाम तरीके से सत्ता चलाई। ट्रंप ने अपने फैसलों पर `अमेरिका फर्स्ट’ जैसे राष्ट्रीय तत्व का मुलम्मा चढ़ाया। दुनियाभर पर `टैरिफ’ का हंटर चलाया। अपने पैâसलों पर शेखी बघारते हुए उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका की सरकारी तिजोरी छलक उठेगी और अमेरिका पर कर्ज का बोझ कम होगा। ईरान के खिलाफ सीधा युद्ध करके अमेरिका समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में धकेलते समय भी उन्होंने ऐसी ही लफ्फाजी की थी। मगर यह सब उनके गले पड़ गया। ट्रंप महाशय की लोकप्रियता तो गिरी ही, साथ ही चरमराती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, र्इंधन की कीमतें इससे आम अमेरिकी जनता भी नाराज हुई। इसी का बदला उसने अब मध्यावधि चुनाव में लिया है। ट्रंप को भी इस नाराजगी का पहले से अंदाजा था। इसीलिए दो महीने पहले उन्होंने प्रत्येक एडल्ट अमेरिकी नागरिक को पांच हजार डॉलर सीधे नकद देने की
ट्रंप डिविडेंड योजना
घोषित की थी, मगर अमेरिकी मतदाताओं ने इस डिविडेंड को दुत्कार दिया। ऐसा नहीं है कि इन परिणामों से ट्रंप की कुर्सी या रिपब्लिकन पार्टी की सत्ता तुरंत चली जाएगी। मगर पिछले दो वर्षों में ट्रंप ने सत्ता का जो घमंड और ढिठाई दिखाई थी, उसे उत्तरार्ध में वैसा ही दिखाते समय उन्हें सौ बार सोचना पड़ेगा। बहरहाल, ट्रंप सनकी शख्स हैं। इस हार को वे आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। इसीलिए एक तरफ मध्यावधि का परिणाम स्वीकार करने की तैयारी उन्होंने दिखाई है और राग अलापना शुरू कर दिया है कि वे विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ काम करेंगे। मगर साथ ही अमेरिकी प्रेसिडेंट को प्राप्त `वीटो’ (विशेष अधिकार) की भी याद उन्होंने विरोधियों को दिला दी है। उन्होंने खुली धमकी दी है कि डेमोक्रेट्स की नीतियों पर लगाम कसने के लिए वे वीटो नामक संवैधानिक अस्त्र का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर `नूद’ शब्द अंकित प्रसिद्ध लाल रंग की `MAGA’ टोपी पोस्ट करके सरेआम कहा है,’ दूसरे मुझे `मिस्टर वीटो’ कहें तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा’। उनके `वीटो’ के खिलाफ डेमोक्रेटिक पक्ष `महाभियोग’ का अस्त्र इस्तेमाल कर सकता है, परंतु उसके लिए आवश्यक दो-तिहाई संख्याबल उनके पास नहीं है। इसलिए वीटो को निष्फल करना उनके लिए जरा भी आसान नहीं होगा, यह बात ट्रंप जैसे
व्यापारी और हठधर्मिता
वाले इंसान को मालूम है। अत: वे एक तरफ तालमेल बिठाने और दूसरी तरफ वीटो के इस्तेमाल की भाषा बोल रहे हैं। ट्रंप के कार्यकाल का पूर्वार्ध उनकी तानाशाही का था। अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्ति को आर्थिक संकट में डालने वाला और वैश्विक राजनीति में बेवजह कई दुश्मन पैदा करने वाला था। उस पर लगाम कसने के लिए अमेरिकी मतदाताओं ने मध्यावधि चुनाव में ट्रंप-विरोधी जनादेश देते हुए उन्हें जमीन पर ला पटका है, परंतु ट्रंप सनकी हैं। वे सुधरेंगे ही, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए अमेरिका के राजनीतिक पटल पर कल डेमोक्रेटिक पार्टी बनाम ट्रंप का `वीटो’ ऐसा नया राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है। अमेरिकी संसद सियासी अखाड़ा बनती हुई दिखाई दे सकती है। बहरहाल, इससे अमेरिकी मतदाताओं द्वारा दिया गया जनादेश कम महत्वपूर्ण नहीं हो जाता। मतदाताओं ने जो समझदारी पिछले हफ्ते इजरायल में दिखाई थी, वही मंगलवार को अमेरिका में दिखाई। इजरायल और अमेरिका दोनों मित्र राष्ट्र हैं। इन दोनों देशों में मतदाताओं ने सत्तापक्षों को उनकी जगह दिखा दी है। मतदाताओं ने उनकी बेलगाम युद्ध पिपासा और अंधेरगर्दी पर लगाम लगाने वाला जनादेश दिया है। भारतीय हुक्मरान तो इन दोनों मित्र राष्ट्रों के `माय डियर फ्रॉड’ हैं। इसलिए समझने वालों को इशारा काफी है! इजरायल-अमेरिका में दिवाली से पहले ही पटाखे फूट चुके हैं, मगर उनका धुआं भारत में निकलेगा यह तय है!

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