-परिजनों ने महाराष्ट्र सरकार पर करोड़ों रुपये का भुगतान रोकने से गंभीर आर्थिक दबाव का आरोप लगाया
-संगठन ने `९० हजार करोड़ बकाया बताया
सामना संवाददाता / पुणे
महाराष्ट्र में सरकारी परियोजनाओं का काम करने वाले चार ठेकेदारों की आत्महत्या के मामलों ने लंबित सरकारी भुगतान और छोटे ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवारों का दावा है कि किए गए काम के बिल लंबे समय तक नहीं मिलने से वे कर्ज और मानसिक दबाव में थे।
परिजनों के अनुसार, अलग-अलग मामलों में लगभग ६० लाख रुपये से ४० करोड़ रुपये तक का भुगतान लंबित था। इनमें लोक निर्माण और जलजीवन मिशन जैसी सरकारी परियोजनाओं से जुड़े काम बताए गए हैं। ठेकेदार संगठन का दावा है कि विभिन्न विभागों पर कुल बकाया करीब ९०,००० करोड़ रुपये हो सकता है। सरकार की ओर से इस समग्र आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आत्महत्या के प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं; केवल लंबित भुगतान को बिना जांच मृत्यु का एकमात्र कारण नहीं कहा जा सकता। पुलिस को आर्थिक रिकॉर्ड, कर्ज, पत्राचार और संबंधित विभागों के भुगतान निर्णय की जांच करनी होगी।
राज्य सरकार को विभागवार प्रमाणित बकाया, बिल स्वीकृति की तारीख और भुगतान समयसीमा सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि काम पूरा और माप-पुस्तिका स्वीकृत है तो अनिश्चित विलंब सरकारी वित्तीय अनुशासन की विफलता है। परिवारों को जांच और वैधानिक सहायता भी मिलनी चाहिए।
