मुख्यपृष्ठनए समाचार`पांच हजार रुपए में दिवाली मनाकर दिखाइए!'

`पांच हजार रुपए में दिवाली मनाकर दिखाइए!’

-गंगापुर में नाराज किसानों ने आदित्य ठाकरे के सामने बयां किया अपना दर्द!
-आदित्य ठाकरे ने अहिल्यानगर में सूखाग्रस्त किसानों से की मुलाकात

सामना संवाददाता / अहिल्यानगर

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सूखाग्रस्त किसानों को पांच हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का खूब प्रचार किया, लेकिन हकीकत यह है कि गांव के करीब ७० फीसदी किसानों तक यह मदद पहुंची ही नहीं। पांच हजार रुपए में दिवाली वैâसे मनाई जाए? फडणवीस सरकार खुद पांच हजार रुपए में दिवाली मनाकर दिखाए। गंगापुर तालुका के भेंडाला गांव में किसानों ने शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे के सामने अपनी यह पीड़ा रखी। छत्रपति संभाजीनगर से अहिल्यानगर जाते समय आदित्य ठाकरे ने भेंडाला में किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इससे पहले उन्होंने विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे, अंबादास दानवे समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
किसानों ने बताया कि गांव के महज ३० फीसदी किसानों को ही पांच हजार रुपए की सहायता मिली है, जबकि ७० फीसदी किसान अब भी सरकारी मदद से वंचित हैं। किसानों ने कर्जमाफी के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि घोषणाएं तो खूब हुर्इं, लेकिन अनेक किसानों को अब तक कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला। खेती का खर्च, कर्ज का बोझ और आर्थिक तंगी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त जारी होने के बावजूद कई किसानों के खातों में पैसे नहीं पहुंचे हैं।
निजी वित्तीय कंपनियों की वसूली से किसान परेशान
किसानों ने निजी वित्तीय और सूक्ष्म वित्त कंपनियों की मनमानी वसूली का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि सूखे और आर्थिक संकट के बावजूद कंपनियां लगातार फोन कर कर्ज की किस्तें भरने के लिए दबाव बना रही हैं। जबकि जिला प्रशासन ने जबरन वसूली नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद किसानों को वसूली के लिए फोन किए जा रहे हैं।
‘सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं, राहत भी दे’ -आदित्य ठाकरे
आदित्य ठाकरे ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेने की जरूरत है। कर्जमाफी, सूखा राहत, फसल बीमा और निजी वित्तीय कंपनियों की प्रताड़ना जैसे मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। केवल आश्वासन और घोषणाओं से किसानों की समस्याएं हल नहीं होंगी। सरकार को जमीन पर काम करके दिखाना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में शिवसेना किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।

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