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ट्रंप हारे, अगला नंबर किसका?

-डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल किया -भारत के व्यापार, वीजा, तेल और ईरान युद्ध से जुड़े हितों पर भी पड़ेगा असर

एजेंसी / वॉशिंगटन / नई दिल्ली

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। रिपब्लिकन प्रभाव वाले कई राज्यों में भी डेमोक्रेट उम्मीदवारों की जीत हुई। मतदाताओं के बीच महंगाई, ईरान युद्ध, आयात शुल्क और प्रशासन की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे रहे। अब सवाल है कि क्या दुनिया के दूसरे सत्ताधीशों की भी मुश्किलें बढ़ेंगी? इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। जनवरी में नई कांग्रेस कार्यभार संभालने के बाद ट्रंप प्रशासन की नियुक्तियों, युद्ध संबंधी पैâसलों और सरकारी खर्च की जांच कर सकती है।
इसलिए सत्ता संतुलन बदलने का अर्थ ट्रंप की नीतियों का तत्काल अंत नहीं है। भारत के लिए अमेरिकी बदलाव का सीधा संबंध प्रस्तावित व्यापार समझौते, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क, एच-१बी वीजा, विद्यार्थियों और रक्षा सहयोग से है।डेमोक्रेट बहुमत आव्रजन तथा राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर अधिक संसदीय निगरानी ला सकता है। इससे भारत को कुछ नीतिगत राहत मिल सकती है, पर निर्णायक बदलाव के लिए कानून पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी। ईरान युद्ध और तेल बाजार पर अमेरिकी नीति भारत के आयात बिल तथा महंगाई के लिए सबसे तात्कालिक चिंता रहेगी।
ईरान जंग, महंगाई और अतिआत्मविश्वास ने डुबोई ट्रंप की नैया!
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। महंगाई, ईरान युद्ध, टैरिफ नीतियों और सरकार के कामकाज को लेकर मतदाताओं की नाराजगी ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं।
चुनावी नतीजों की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी जीत दर्ज की, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। टेक्सास, कंसास और दक्षिण कैरोलिना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की सीनेट जीत ऐतिहासिक मानी जा रही है। आयोवा और ओहायो में भी रिपब्लिकन सीटें डेमोक्रेट्स के खाते में गर्इं। ओहायो में ट्रंप समर्थित भारतीय मूल के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेट एमी एक्टन ने पराजित कर दिया। वहीं सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन ने रिपब्लिकन जॉन हस्टेड को हराया। चुनाव के बाद हुए विश्लेषण में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। एग्जिट पोल में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने आर्थिक परेशानियों को अपने पैâसले का महत्वपूर्ण आधार बताया। ईरान युद्ध और टैरिफ नीतियों के आर्थिक प्रभाव ने भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ असंतोष बढ़ाया। इन नतीजों का असर अगले दो वर्षों में अमेरिकी राजनीति पर दिखाई देगा।
-लोकतंत्र को पांच साल का इंतजार क्यों?
-अमेरिकी नतीजे पर भारत में चुनावी बहस
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद कांग्रेस ने भारत में प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ व्यवस्था पर नया राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि कार्यकाल के बीच होने वाले चुनाव सरकार को जनता के सामने जवाबदेह बनाते हैं और मतदाताओं को नीतियों पर अपनी राय व्यक्त करने का अवसर देते हैं। कांग्रेस ने तर्क दिया कि लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से सरकारों के कामकाज की मध्यावधि जन-परीक्षा कमजोर हो जाएगी।

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