-शिंदे गुट के विधायक की धमकी पर कोर्ट सख्त अब्दुल सत्तार समेत ४ अधिकारियों को नोटिस
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की सिल्लोड-सोयगांव विधानसभा सीट पर २०२४ के चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से धमकी भरी भाषा के इस्तेमाल का मामला अब न्यायिक मोड़ पर पहुंच गया है। शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार समेत चार अधिकारियों को सिल्लोड की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
आरोप है कि चुनाव प्रचार की अंतिम जनसभा में विधायक अब्दुल सत्तार ने मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि जो लोग उन्हें वोट नहीं देंगे, उनके नाम गुप्त रूप से पर्चियों के जरिए बताए जाएं और ऐसे मतदाताओं का ‘रामबाण इलाज’ किया जाएगा।
बायपास सर्जरी करने की दी थी धमकी
शिकायत में दावा किया गया है कि इस कथित बयान में गोली देने, इंजेक्शन, एंजियोप्लास्टी, एंजियोग्राफी और बायपास सर्जरी जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिसे मतदाताओं को डराने की कोशिश माना गया। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गणेश शंकरलाल शंकरपेल्ली ने सबसे पहले ‘सी-विजिल’ ऐप के जरिए और सिल्लोड के चुनाव अधिकारी लतीफ पठान के पास शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत को पहले किया खारिज
आरोप है कि आदर्श आचार संहिता दल के तत्कालीन प्रमुख दादाराव श्रीपत अहिरे ने विधायक का पक्ष लेते हुए शिकायत को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला निर्वाचन अधिकारी व जिलाधिकारी के समक्ष अपील की, लेकिन लगभग एक वर्ष तक लगातार पत्राचार और अनुसरण के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अंतत: शंकरपेल्ली ने स्वयं पक्षकार बनकर सिल्लोड अदालत में निजी आपराधिक शिकायत दायर की।
अदालत ने किया तलब
अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए विधायक अब्दुल सत्तार, आचार संहिता दल के तत्कालीन प्रमुख दादाराव अहिरे, उपविभागीय अधिकारी व निर्वाचन अधिकारी लतीफ पठाण तथा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी दिलीप स्वामी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह मामला चुनावी आचार संहिता, मतदाता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा माना जा रहा है, जिस पर अब न्यायालय की नजरें टिकी हैं।
