मुख्यपृष्ठस्तंभरसोई से रची गई साजिश...हेदर मूक केस पर ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री

रसोई से रची गई साजिश…हेदर मूक केस पर ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री

-पति को स्पेगेटी में जहर देकर मारने की साजिश!

-टीवी पर फिर लौटेगी खौफनाक सच्ची कहानी

-चैनल ५ की डॉक्यूमेंट्री The Poisoning: How to Kill Your Husbandमें हेदर मूक केस की परतें खुलेंगी

ट्रू-क्राइम देखने वालों के लिए ब्रिटेन का चर्चित हेदर मूक केस एक बार फिर टीवी स्क्रीन पर लौट रहा है। चैनल ५ की डॉक्यूमेंट्री The Poisoning: How to Kill Your Husband में उस महिला की कहानी दिखाई जाएगी, जिसने अपने पति जॉन मूक के खाने में चोरी-छिपे जहर मिला दिया था। यह डॉक्यूमेंट्री पहले भी प्रसारित हो चुकी है और अब ७ जुलाई २०२६ की रात चैनल ५ पर फिर दिखाई जानी थी।
मामला वर्ष २००८ का है। हेदर मूक को अपने पति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जहर देने के दो आरोपों में दोषी ठहराया गया था। हैरानी की बात यह रही कि जॉन मूक इस हमले से बच गए और बाद में उन्होंने अदालत के बाहर कहा कि उनकी पत्नी को जेल से ज्यादा गंभीर मानसिक/पेशेवर मदद की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, हेदर ने पति के पास्ता में चूहे मारने की दवा और एंटी-डिप्रेसेंट दवा मिलाई थी। आरोप था कि उसका उद्देश्य पति को इतना असमर्थ कर देना था कि वह उसकी मां से जुड़ी करीब ४३ हजार पाउंड की रकम के मामले में अपनी चाल आगे बढ़ा सके। जूरी ने लगभग ढाई घंटे में उसे दोषी माना।
मुकदमे के दौरान यह भी सामने आया कि यह हेदर का पहला ऐसा मामला नहीं था। वर्ष १९८२ में वह अपनी सात वर्षीय बेटी टेरेसा को दवा मिलाकर नुकसान पहुंचाने के मामले में भी दोषी ठहराई जा चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि हेदर के पास कई दवाओं तक पहुंच थी, क्योंकि वे दवाएं उसे खुद के लिए लिखी गई थीं।
अदालत में हेदर को बेहद चालाक और दूसरों के लिए खतरा बताया गया। जज ने उसे ‘खतरनाक महिला’ माना और अनिश्चित अवधि की सजा सुनाई। इसका मतलब था कि जन-सुरक्षा को देखते हुए उसकी रिहाई की कोई तय तारीख नहीं थी, हालांकि पांच साल की सजा पूरी करने के बाद वह पैरोल के लिए पात्र हो सकती थी। यह डॉक्यूमेंट्री सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते में छिपे अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि लालच, धोखा और मानसिक असंतुलन किस तरह घर की रसोई को भी अपराध की जगह बना सकते हैं। ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री की लोकप्रियता का कारण भी यही है वे दर्शक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि सबसे बड़ा खतरा कई बार बाहर नहीं, घर के भीतर बैठा होता है।

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