सामना संवाददाता / नई दिल्ली
रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ सियासी घमासान तेज हो गया। विपक्षी नेताओं ने एक सुर में लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार पर खतरे का आरोप लगाते हुए सत्ता को ललकारा। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बदलाव के लिए निर्णायक आवाज उठाने की चेतावनी दी, तो वहीं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने युवा पीढ़ी को जगाया। अखिलेश यादव, मुकुल वासनिक और संजय यादव ने भी भाजपा तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे हमले किए।
‘आज नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी!’
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की महारैली को लोकतंत्र बचाने का अभियान बताते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। गहलोत ने कहा कि देश और लोकतंत्र को कैसे बचाया जाए, यह आज की युवा पीढ़ी के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युवा इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें माफ नहीं करेंगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रैली कांग्रेस या `इंडिया’ गठबंधन तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की चिंता करने वाले सभी लोगों के लिए है। उन्होंने मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक जागरूकता की जरूरत बताई।
‘सड़कों पर उतरी जनता भाजपा के लिए चेतावनी!’
राष्ट्रीय जनता दल के नेता संजय यादव ने रामलीला मैदान की महारैली के दौरान कहा कि दिल्ली की सड़कों पर दिखाई दे रहा जनसमर्थन भारतीय जनता पार्टी के लिए चेतावनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ व्यवस्था लोकतंत्र और संविधान को कमजोर कर रही है तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संजय यादव ने कहा कि देश के आम लोग संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि निर्वाचन संस्थाओं के जरिए संविधान को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
`लोकतंत्र की हल्दीघाटी में नया इतिहास लिखा जा रहा है’
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ बताया। उन्होंने कहा कि यहां नया इतिहास लिखा जा रहा है और `इंडिया’ गठबंधन के नेता तथा कार्यकर्ता लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं। अखिलेश ने दावा किया कि २०२७ में उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी का सफाया होगा। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लाखों लोग लोकतंत्र बचाने की मुहिम में शामिल हुए हैं। उन्होंने दो टूक कहा, ‘ज्ञानेश कुमार को जाना होगा।’ पायलट ने दावा किया कि देश के नौजवान समझते हैं कि संविधान खतरे में है और पूरा देश एकजुट हो रहा है। रैली में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।
‘अभी नहीं बदला तो बहुत देर हो जाएगी!’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को रामलीला मैदान में `इंडिया’ गठबंधन की महारैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। महबूबा ने सभा में मौजूद लोगों से कहा कि देश की समस्याओं को बदलने के लिए अब आगे आना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभी बदलाव के लिए आवाज नहीं उठाई गई तो बहुत देर हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की संपत्तियां चुनिंदा कारोबारियों के हाथों में सौंप रही है। महबूबा ने भाजपा की हिंदुत्व संबंधी राजनीति पर भी सवाल उठाए और भगवान राम के नाम पर चंदे के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
‘ज्ञानेश कुमार अब बच नहीं पाएगा!’
कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने इंडिया गठबंधन की महारैली में उमड़ी भीड़ को लेकर दावा किया कि रामलीला मैदान में पहले भी अनेक विशाल जनसभाएं हुई हैं, लेकिन रविवार की रैली का स्वरूप अलग है। वासनिक ने कहा कि इस सभा से जो संदेश निकल रहा है, उसके बाद ज्ञानेश कुमार बच नहीं पाएगा। उनका बयान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे विपक्षी आंदोलन के संदर्भ में आया। वासनिक ने रैली को चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दबाव का महत्वपूर्ण प्रदर्शन बताया।
