सामना संवाददाता / प्रयागराज
मोदी-योगी के राज में एक बार फिर सनातन का घोर अपमान देखने को मिला। संगमनगरी प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर स्नान करने के लिए पहुंचे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पुलिसिया प्रकोप का सामना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस ने उनके वेदपाठी शिष्यों से मारपीट भी की। इसके बाद प्रशासनिक अपमान से नाराज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना स्नान किए शिविर में लौट आए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने आगे बढ़ने से रोक दिया। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल चलने को कहा, लेकिन उनके समर्थक और भक्त नहीं माने और आगे बढ़ने लगे।
उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या पर्व पर छोटे-बड़े सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। संगम नोज पर एक दिन पहले से प्रतिबंध लागू था। मेला एवं कमिश्नरी प्रशासन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि प्रमुख स्नान पर्वों पर किसी भी प्रकार के वाहनों का प्रवेश मेला क्षेत्र विशेष रूप से संगम नोज पर प्रतिबंधित रहेगा। शंकराचार्य मौनी अमावस्या स्नान को शिष्यों संग रथ पर सवार होकर निकले थे। इन्हें व इनके शिष्यों को रथ से संगम जाने से रोका गया तो मौके पर हंगामा शुरू हो गया। जिस पर प्रशासन सक्रिय हो गया। जानकारी मिली तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज आदि कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
यूपी सरकार के गृह सचिव ने की धक्का-मुक्की
संगमनगरी प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर स्नान करने के लिए ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जब अपनी पालकी से अखाड़े से निकल कर संगम नोज पर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों से यूपी सरकार के गृह सचिव ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। जिसके बाद तनाव बढ़ता गया और अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से ही मना कर दिया। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया है कि संतों एवं समर्थकों के साथ मारपीट हुई। यह सब ऊपर के आदेश पर कराया गया। इस दौरान संगम क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। शंकराचार्य के समर्थक साधु-संतों और पुलिस में तीखी नोक-झोंक होने लगी थी। ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही करने का आरोप लगाया। घटना के चलते संगम क्षेत्र में अफरातफरी मच गई थी। प्रशासनिक रवैए से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बीच में ही अमावस्या स्नान से मना कर दिया। उन्होंने अपनी पालकी बीच रास्ते से शिविर में लौटा ली। तीखी बहस और धक्का-मुक्की के बाद शंकराचार्य के सभी शिष्यों को पुलिस वालों ने हिरासत में ले लिया। इनमें से एक शिष्य बहुत ज्यादा मुखर होकर प्रशासनिक अधिकारियों से बहस कर रहा था। आरोप लगाया जा रहा है कि उसे संगम क्षेत्र में बने अस्थाई पुलिस चौकी में ले जाकर मारपीट की। शिष्य बराबर गुहार लगाता रहा कि उसे छोड़ दिया जाए।
