पीआई इंडस्ट्रीज ने पेश किया ‘पियोक्सैनिलिप्रोले’, एक दशक से अधिक की रिसर्च और वैज्ञानिक नवाचार का नतीजा
मुंबई। भारतीय कृषि और कीटनाशक उद्योग के क्षेत्र में देश ने एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। पीआई इंडस्ट्रीज ने भारत में खोजे गए पहले स्वदेशी कीटनाशक मॉलिक्यूल ‘पियोक्सैनिलिप्रोले’ को पेश किया है। एक दशक से अधिक समय तक चले गहन शोध, वैज्ञानिक प्रयोगों और निरंतर निवेश से विकसित यह मॉलिक्यूल भारतीय कृषि अनुसंधान और नवाचार की वैश्विक क्षमता का नया प्रमाण माना जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, पियोक्सैनिलिप्रोले का विकास भारतीय कृषि की विविध परिस्थितियों, फसलों और कीटों से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया गया है। इस उपलब्धि से भारत की पहचान केवल कृषि उत्पादों और तकनीकों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश अब अपनी मौलिक वैज्ञानिक खोज और बौद्धिक संपदा के दम पर भी वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा हो सकेगा।
पीआई इंडस्ट्रीज पिछले आठ दशकों से अधिक समय से भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और किसानों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसी अनुभव और जमीनी समझ को कंपनी ने अपनी उन्नत अनुसंधान क्षमता के साथ जोड़कर इस नए मॉलिक्यूल को विकसित किया है। इसके प्रभाव और उपयोगिता का आकलन करने के लिए भारतीय कृषि परिस्थितियों में विभिन्न स्थानों पर फील्ड ट्रायल, वैज्ञानिक परीक्षण और नियामकीय अध्ययन किए गए। इस प्रक्रिया में राज्य कृषि विश्वविद्यालयों सहित देश के कृषि अनुसंधान संस्थानों की भी भागीदारी रही।
इस मॉलिक्यूल को केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबीआरसी) से पंजीकरण मिला है। यह समिति केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है। कंपनी के अनुसार, समिति ने इसे भारत में खोजा गया पहला कीटनाशक सक्रिय घटक माना है।
यह उपलब्धि भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, इससे देश में अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी तकनीक विकसित करने की संभावनाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
