-बेयॉ टेपेस्ट्री के रहस्यमय दृश्य ने उठाए विलियम द कॉन्करर की वैधता पर सवाल
करीब एक हजार साल पुरानी कढ़ाई का एक छोटा-सा दृश्य इतिहासकारों के लिए बड़ी पहेली बन गया है। १०६६ में इंग्लैंड पर नॉर्मन विजय की कहानी बताने वाली विश्वप्रसिद्ध बेयॉ टेपेस्ट्री में एक महिला, एक पादरी और नीचे बनी नग्न पुरुष आकृति अब ऐसे कथित राजसी सेक्स स्कैंडल से जोड़ी जा रही है, जिसके राजनीतिक मायने इंग्लैंड के इतिहास तक पहुंचते हैं।
करीब ७० मीटर लंबी बेयॉ टेपेस्ट्री ११वीं शताब्दी में बनाई गई थी। इसमें विलियम द कॉन्करर के इंग्लैंड अभियान, बैटल ऑफ हेस्टिंग्स और उससे पहले की राजनीतिक घटनाओं को कढ़ाई के माध्यम से दर्ज किया गया है। यह ऐतिहासिक कृति लगभग एक हजार साल बाद पहली बार इंग्लैंड लाई गई है और १० सितंबर से ब्रिटिश म्यूजियम में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखी जाएगी।
कौन है रहस्यमय ‘एल्फगीवा’?
सबसे ज्यादा चर्चा टेपेस्ट्री के उस दृश्य की है, जिसमें एक महिला के ऊपर लैटिन में ‘एल्फगीवा’ लिखा है। उसके सामने एक धार्मिक व्यक्ति दिखाई देता है, जिसका हाथ महिला के चेहरे की ओर है। नीचे की पट्टी में नग्न पुरुष आकृति अपने जननांगों के साथ दिखाई गई है।
समस्या यह है कि इस दृश्य का अर्थ आज तक निश्चित नहीं हो पाया। ‘एल्फगीवा’ उस दौर में प्रचलित महिला नाम था, इसलिए इतिहासकार यह तय नहीं कर पाए हैं कि तस्वीर में वास्तव में कौन है। दृश्य के साथ लिखा वाक्य भी अधूरा-सा है, मानो ११वीं सदी के दर्शकों को उस घटना का संदर्भ पहले से मालूम रहा हो। अब ब्रिटिश म्यूजियम से जुड़े टेपेस्ट्री विशेषज्ञ प्रोफेसर माइकल लुईस ने एक सनसनीखेज संभावना सामने रखी है। उनका मानना है कि महिला नॉर्मंडी की एमा हो सकती हैं। एमा इंग्लैंड के राजा एथेलरेड की पत्नी, एडवर्ड द कॉन्फेसर की मां और विलियम द कॉन्करर की परदादी की पीढ़ी की करीबी रिश्तेदार-उनकी ग्रेट-आंट थीं।
पादरी के साथ संबंध का संकेत?
एमा को लेकर मध्यकालीन कथाओं में एक धार्मिक पदाधिकारी के साथ कथित संबंध की कहानी मिलती है।
लुईस का अनुमान है कि टेपेस्ट्री का रहस्यमय दृश्य शायद उसी पुराने आरोप की ओर इशारा करता हो। यदि ऐसा है तो नग्न व्यक्ति की आकृति केवल सजावट नहीं, बल्कि मुख्य दृश्य पर व्यंग्यात्मक या यौन टिप्पणी भी हो सकती है। हालांकि, इसे प्रमाणित इतिहास मानना जल्दबाजी होगी। दूसरे इतिहासकार इस दृश्य की अलग-अलग व्याख्या करते रहे हैं और महिला की पहचान पर कोई सर्वसम्मति नहीं है। लेकिन इसी अनुमान से एक बड़ा राजनीतिक सवाल पैदा होता है।
विलियम के सिंहासन के दावे पर क्यों पड़ता है असर?
विलियम द कॉन्करर ने १०६६ में इंग्लैंड पर हमला किया और बैटल ऑफ हेस्टिंग्स में राजा हैरोल्ड को हराकर इंग्लैंड का राजा बना। उसके सिंहासन के दावे के कई आधारों में एडवर्ड द कॉन्फेसर से उसका पारिवारिक संबंध भी महत्वपूर्ण था। यदि टेपेस्ट्री वास्तव में एमा से जुड़े किसी कथित सेक्स स्वैंâडल का संकेत देती है, तो इसे शाही वंश, पारिवारिक प्रतिष्ठा और उत्तराधिकार की वैधता पर टिप्पणी के रूप में भी पढ़ा जा सकता है। यही वजह है कि इस छोटी-सी तस्वीर की नई व्याख्या को कुछ मीडिया रिपोर्टों ने ‘यूरोपीय इतिहास दोबारा लिखने’ तक से जोड़ दिया है। हालांकि, तथ्य यह है कि इससे १०६६ की नॉर्मन विजय या विलियम के शासन का स्थापित इतिहास अचानक गलत साबित नहीं हो जाता। यह एक ऐतिहासिक व्याख्या है, कोई नया निर्णायक दस्तावेज नहीं।
९३ या ९४ जननांग!
बेयॉ टेपेस्ट्री से जुड़ा दूसरा हैरान करने वाला तथ्य इसकी नग्न आकृतियां हैं। ऑक्सफोर्ड के इतिहासकार जॉर्ज गार्नेट ने इसमें ९३ पुरुष जननांग गिने थे-इनमें ८८ घोड़ों और पांच मनुष्यों के बताए गए। बाद में इतिहासकार क्रिस्टोफर मोंक ने दावा किया कि एक और आकृति को मिलाकर संख्या ९४ होनी चाहिए। दोनों इतिहासकारों में इसे लेकर बाकायदा विद्वत बहस हुई।
इसलिए टेपेस्ट्री के ये दृश्य सिर्फ अश्लील सजावट मानकर खारिज कर देना भी आसान नहीं है। मध्यकालीन कलाकार कई बार शरीर, जानवरों और सीमावर्ती चित्रों के माध्यम से सत्ता, वीरता, व्यंग्य और नैतिक संदेश देते थे। यानी एक हजार साल पहले सुई और धागे से बनाई गई इस कहानी में युद्ध के साथ सत्ता, प्रेम, सेक्स, प्रचार और राजवंश की राजनीति भी छिपी हो सकती है। सवाल सिर्फ इतना है-क्या हम आज उस संकेत को ठीक उसी तरह पढ़ पा रहे हैं, जैसा उसका निर्माता चाहता था?
