रोहित माहेश्वरी लखनऊ
प्रोटोकॉल टूटा तो खिसक गई बीजेपी श्थ्ण् की ‘मर्यादा’!
कहते हैं राजनीति में नेता को अपनी जान से ज्यादा प्यारी ‘कुर्सी’ होती है। उत्तर प्रदेश के झांसी में बीजेपी के शिक्षक विधायक (श्थ्ण्) डॉ. बाबूलाल तिवारी ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच पर भाषण देने खड़े हुए और इधर माननीय विधायक जी का ‘प्रोटोकॉल’ डगमगा गया। देर से आने की सजा यह मिली कि उनकी पसंदीदा कुर्सी पर कोई और ‘भाग्यशाली’ नेता विराजमान था। फिर क्या था? आत्मसम्मान की मशाल ऐसी जली कि विधायक जी ने आव देखा न ताव, सुरक्षाकर्मियों के टोकते ही कुर्सी को हवा में ऐसा झटका दिया मानो सारा गुस्सा उसी निर्जीव प्लास्टिक पर निकालना हो। मंच पर भाषण चल रहा था और पर्दे के पीछे ‘कुर्सी छोड़ो आंदोलन’ जारी था। विधायक जी बाद में मान तो गए, लेकिन यह साबित कर गए कि चाहे लोकतंत्र का मंच हो या स्कूल की क्लास, अगर पहली बेंच न मिले, तो माननीय बस्ता समेटकर घर लौटने की धमकी देना नहीं भूलते!
‘बोली’ लगाओ, ‘विधायक’ बन जाओ
यूपी में लोकतंत्र की सेल, करोड़ों में बिक रही ‘टिकट’!
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘लोकतंत्र’ की बंपर सेल चल रही है। जनता सोचती है कि नेता जी जमीन पर पसीना बहाकर टिकट लाएंगे, लेकिन यहां तो खेल ही ‘वैâश ऑन डिलिवरी’ का निकला। एक खुफिया स्टिंग में खुलासा हुआ कि कुछ छोटे दलों के दफ्तरों में जनसेवा की नहीं, बल्कि दो से आठ करोड़ रुपए की ‘टिकट डील’ की बोलियां लग रही हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरने वाली सरकार की नाक के नीचे यह करोड़ों का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जो सरकार छोटे-मोटे मामलों पर बुलडोजर दौड़ा देती है, वह अपने सहयोगियों की इस ‘वैâश विंडो’ पर पूरी तरह मौन है। अब आम आदमी समझ चुका है कि चुनाव जीतने के लिए नीति या नीयत की नहीं, बल्कि तिजोरी की जरूरत है। सरकार भले ही इसे ‘पार्टी का अंदरूनी मामला’ कहकर पल्ला झाड़ ले, लेकिन जनता देख रही है कि वैâसे लोकतंत्र को चंद ‘माननीयों’ ने बिजनेस मॉडल बना दिया है!
अखिलेश का तंज:
खिसकती जमीन, खोया आत्मविश्वास और भाजपा की धमकियां
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखे सवालों की झड़ी लगाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी और प्रशासनिक रणनीति पर करारा कटाक्ष किया है। अखिलेश ने इशारों-इशारों में तंज कसा कि सत्ता पक्ष के हालिया भाषणों में जनहित के बयान कम और हताशा भरी धमकियां ज्यादा दिखाई दे रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह दौरा अचानक तय हुआ था या फिर एसआईटी के गठन के साथ ही इसकी पटकथा लिख दी गई थी? सूत्रों के हवाले से सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि स्थानीय भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों की डूबती साख और खिसकती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए यह ‘आपातकालीन’ कार्यक्रम आनन-फानन में रचा गया। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अगर ऐसा न किया जाता, तो अयोध्या मंडल समेत पूरे उत्तर प्रदेश से भाजपा का ‘सूपड़ा साफ’ होना तय था।
