-जानवरों से सीधी बातचीत का सपना होगा सच
-शोधकर्ताओं का मानना है कि एआई जानवरों की आवाजों, संकेतों और व्यवहार में छिपे पैटर्न को पहचान सकता है। फ्रांस और जर्मनी समेत कई देश चिंपैजी, चूहे, डॉल्फिन, बोनोबो और अलग-अलग पक्षियों की आवाजों तथा व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं।
कुत्ते के भौंकने, पक्षियों के चहचहाने या व्हेल की आवाजों का असली मतलब क्या होता है? सदियों से इंसान इस सवाल का जवाब तलाश रहा है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई इस रहस्य से पर्दा उठाने की दिशा में बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक एआई की मदद से जानवरों की आवाजों, हाव-भाव और व्यवहार के विशाल डेटा का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वे एक-दूसरे से क्या संदेश साझा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई ऐसे अनुवादक सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकता है, जो जानवरों के संकेतों को इंसानी भाषा में बदल सकें और इंसानों के संदेशों को जानवरों तक पहुंचा सके। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो इंसान और जानवरों के बीच संवाद का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
बता दें कि एआई सिर्फ इंसानों के काम तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल यह समझने के लिए कर रहे हैं कि जानवर आपस में वैâसे बात करते हैं। कई देशों में शोधकर्ता चिंपैंजी, चूहे, डॉल्फिन, बोनोबो और पक्षियों की आवाजों तथा व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं। एआई से हजारों घंटों के डाटा का विश्लेषण किया जा रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में यह तकनीक इंसानों और जानवरों के बीच संवाद का रास्ता खोल सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि एआई जानवरों की आवाजों, संकेतों और व्यवहार में छिपे पैटर्न को पहचान सकता है। इसके बाद यह समझा जा सकेगा कि किसी आवाज का क्या मतलब है और जानवर क्या संदेश दे रहे हैं।
चूहों और चिंपैंजी पर हो रही खास रिसर्च
फ्रांस और जर्मनी समेत कई देशों के वैज्ञानिक अलग-अलग जानवरों पर अध्ययन कर रहे हैं। एक शोध में अफ्रीकी धारीदार चूहों की १.२२ लाख से अधिक आवाजें रिकॉर्ड की गईं। एआई विश्लेषण से पता चला कि हर कॉलोनी की अपनी अलग ध्वनि पहचान होती है।
