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ऐरोली-कलवा रेल प्रोजेक्ट लटका!..पुनर्वसन की आड़ में धीमी रफ्तार

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में ट्रैफिक और लोकल ट्रेन में भीड़ से राहत दिलाने का दावा करने वाला ऐरोली-कलवा एलिवेटेड रेल कॉरिडोर आठ साल बाद भी अधूरा है। परियोजना का पहला चरण तो पूरा हो गया, लेकिन दूसरा चरण, जो असली बदलाव लाने वाला है अब भी फाइलों और बैठकों में उलझा है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य था कि ठाणे स्टेशन की भीड़ कम हो और मुंब्रा, दिवा, डोंबिवली, कल्याण जैसे इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिले। लेकिन हकीकत यह है कि मुंबई रेलवे विकास निगम (एमआरवीसी) आज भी पुनर्वसन और जमीन अधिग्रहण का हवाला देकर काम को लटका रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, कुल २.४० हेक्टेयर जमीन में से १.८७ हेक्टेयर सरकारी जमीन मिल चुकी है, जबकि मात्र ०.५३ हेक्टेयर निजी जमीन बाकी है। इसके बावजूद काम नहीं बढ़ पाया। साथ ही ७८६ परिवारों का पुनर्वसन अब तक अधर में है। भोला नगर और शिवाजी नगर के ये परिवार आज भी असमंजस में हैं कि उनका भविष्य क्या होगा।
एमआरवीसी बार-बार कहता है कि वह राज्य सरकार, एमएमआरडीए और रेलवे मंत्रालय के साथ मिलकर समाधान निकाल रहा है। लेकिन आठ साल से चल रही यह कवायद आखिर कितने और सालों तक चलेगी?
मात्र ४५ फीसदी हुआ काम
क्या यह जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी नहीं है? क्या एमआरवीसी को जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए कि उसने इतने सालों में सिर्फ ४५ फीसदी काम ही क्यों किया? जब तक एजेंसियां सिर्फ बैठकों और दलीलों में उलझी रहेंगी, तब तक मुंबई को वास्तविक राहत मिलना मुश्किल है।

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