मुख्यपृष्ठसमाचारमनपा मुख्यालय पर सर्वदलीय आंदोलन

मनपा मुख्यालय पर सर्वदलीय आंदोलन

-नाबालिग के यौन शोषण का मामला तूल पकड़ा

-भाजपा नगरसेविका पर सगे भाइयों को संरक्षण का आरोप

-प्रदर्शनकारियों ने अनिता पाटील का मांगा इस्तीफा

सुरेश गोलानी / भायंदर

भारतीय जनता पार्टी की नगरसेविका और महिला व बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा अनिता पाटील के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को भायंदर-पश्चिम स्थित मीरा-भायंदर महानगरपालिका मुख्यालय के बाहर सर्वदलीय आक्रोश आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किया गया।
अनिता पाटील के दो सगे भाइयों द्वारा एक नाबालिग लड़की के साथ किए गए कथित यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के मामले को लेकर पूरे शहर में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। इस आंदोलन में सामाजिक संघठनों के अलावा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सहित कांग्रेस, मनसे के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। ज्ञात हो कि सोमवार को मनपा के अंदर महासभा शुरू थी और बाहर आंदोलनकारी नाबालिग पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए अनिता पाटील के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण इलाके में सुबह से ही भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच तनाव का माहौल बना रहा। इस्तीफे के अलावा आंदोलनकारियों ने अनिता पाटील पर अपने भाईयों को संरक्षण देने का आरोप करते हुए उनको इस मामले में सह-आरोपी बनाने की मांग भी की गई।
क्या है पूरा मामला
आरोप है कि २०११ में जब पीडिता ५वीं कक्षा की छात्रा थी, तब अनिता पाटील के बड़े भाई जयराम चव्हाण ने मनपा विद्यालय के शौचालय में उसके साथ यौन शोषण और दुष्कर्म का वीडियो बनाया था। जयराम के कुछ ही महीनों पहले हुए देहांत के पश्चात अनिता पाटील के छोटे भाई राजेश चव्हाण ने जयराम द्वारा चित्रित वीडियो उसके पास होने का दावा करके नाबालिग के साथ २० मई २०२४ से अप्रैल २०२६ के बीच कथित रूप से उसे ब्लैकमेल कर कई बार शारीरिक शोषण किया। राजेश पर पीड़िता और उसकी मां को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। राजेश के खिलाफ काशीमीरा पुलिस ने नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न, अपहरण और मारपीट के आरोप में भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, २०१२ यानी पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन प्रâॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज) के संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे ५ जून को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल, राजेश न्यायिक हिरासत में है।
गौरतलब है कि अनिता पाटील के बचाव में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा इस संवेदनशील मामले में दिए गए विवादित बयान जिसमें उन्होंने कहा कि पाटील का इस्तीफा लेने से कार्रवाई पर क्या फर्क पड़ेगा और क्या इस्तीफे लेने से दोषियों को फांसी हो जाएगी, ने आग में घी डालने का काम कर दिया है।

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