-उमा सिंह
गजबे है भइया! इश्क के बाजार में अब इंसानों की दुकान मंदी झेल रही है और चैटबॉट की दुकान पर प्रेमियों की लाइन लगी है। पहले आशिक प्रेमिका के घर के चक्कर काटते थे, अब मोबाइल की स्क्रीन पर उंगलियां घिस रहे हैं। पहले प्रेमिका कहती थी, अभी बिजी हूं, बाद में बात करूंगी। अब एआई कहता है, `बताओ बाबू… जानू, आज किसने तुम्हारा दिल दुखाया? ये एआई साथी सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देते। ये फ्लर्ट कर सकते हैं, आपकी पसंद-नापसंद याद रख सकते हैं और रात के दो बजे भी आपकी बातें सुनने के लिए मौजूद रहते हैं। कई महिलाओं का मानना है कि एआई के साथ शारीरिक नजदीकी नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता भावनात्मक रूप से खाली है।
वाह रे टेक्नोलॉजी, मोहब्बत का ऐसा डिजिटल अवतार आया है कि आशिकों को अब न गुलाब खरीदना है, न गर्लफ्रेंड के जन्मदिन की तारीख याद रखनी है और न ही सास-ससुर के सवालों का सामना करना है। बस मोबाइल उठाइए और चैटबॉट को दो मीठे मैसेज भेजिए। उधर से जवाब आएगा, `तुम मेरे लिए बेहद खास हो!’ खबर है कि कुछ महिलाएं महीनों से एआई चैटबॉट को अपना प्रेमी बनाकर रोमांस कर रही हैं। कोई छह महीने से इश्क में है तो कोई नौ महीने से। यानी इंसानी रिश्ते जहां तीन दिन में दम तोड़ देते हैं, वहां मशीन से मोहब्बत की लंबी पारी चल रही है। मगर सवाल है कि यह प्यार है या अकेलेपन का नया वाई-फाई कनेक्शन? एआई न कभी सब्जी लाने से मना करेगा, न सैलरी का हिसाब मांगेगा और न ही कहेगा कि तुम्हारी मां ने फिर फोन किया था। लेकिन जरा सोचिए, जिस प्रेमी को न दिल की धड़कन है, न गले लगने का एहसास, उसके साथ सात जन्मों का सपना कैसा? लगता है आने वाले दिनों में शादी के मंडप में पंडित जी पूछेंगे, `दूल्हा-दुल्हन के साथ चैटबॉट की सहमति भी ले ली गई है न? सब गजबे है जी..!
