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अमेरिका की डूबती अर्थव्यस्था!

धीरज फूलमती सिंह
स्तंभकार-मुंबई
अभी हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुवेला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया, इसके लिए कारण जो भी बताया जा रहा हो लेकिन असली कारण तो तेल का खेल है, जिस की वजह से अमेरिका अपनी अर्थ व्यवस्था को सुधारना चाहता है। सच्चाई यह है कि ट्रंप की जिद्द ने अमेरिका की आर्थिक हालत खराब कर दी है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था, चमक के नीचे दरार के साफ संकेत दिखा रही है।
अमेरिका में बड़े पैमाने पर नौकरियां जा रही हैं। २०२५ में अब तक १.२ मिलियन से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है। जब इतने सारे लोग एक साथ अपनी आमदनी खो देते हैं, तो इससे सभी की खर्च करने की शक्ति पर असर पड़ता है।
ट्रंप के ट्रेड वॉर के बावजूद, अमेरिकी उत्पादन गहरे संकट में है। इस नवंबर में १८,००० नौकरियां गई, यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है, पिछले ३५ महीनों में इस साल रोजगार में गिरावट आई है।
पैâक्ट्री हायरिंग का एक मुख्य पैमाना लगातार १० महीनों से सिकुड़ रहा है, जो आगे और नुकसान का संकेत दे रहा है। दिवालियापन की फाइलिंग लिक्विडिटी की कमी का संकेत देती है। छोटे बिजनेस में इस साल रिकॉर्ड २,२२१ ने दिवालियापन के लिए फाइल किया है। यह ५ सालों में ८३ प्रतिशत ज्यादा है। ज्यादा लागत उन्हें कुचल रही है। साल २०२५ में ७१७ बड़ी कॉर्पोरेट फर्में दिवालिया हो गईं, जो १५ सालों में सबसे ज्यादा है, साल २०२२ से ९३ प्रतिशत की बढ़ोतरी।
एक मुख्य विकास इंजन रुक रहा है और वह है, भारी ट्रकों की बिक्री, जो तीन महीनों में -४७ प्रतिशत गिर गई है। इस तरह की गिरावट सिर्फ मंदी में होती है। अमेरिकी ट्रक ही सब कुछ ले जाते हैं, इस गिरावट का मतलब है कि कंपनियां कम शिपिंग और कंस्ट्रक्शन की आस लगा रही है। यही ट्रेंड जारी रहा, तो २०२६ में और भी गहरी दरारें उभर सकती हैं और अमेरिका आधिकारिक तौर पर मंदी में चला जाएगा। वैसे भी चीन, भारत और रूस के खिलाफ अपनी धौंस भरी झूठी हीरोपंती के बाद ट्रंप किसी भी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।
अब बस यही देखना है कि डोनाल्ड ट्रंप की जिद के चलते मंदी की आशंका में उभरती दरारों के बीच अमेरीकी अर्थव्यस्था का जहाज कब डूबत है?

सोना कितना सोना है!
हम सभी को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए नींद लेने की जरूरत होती है, हालांकि हम में से कई लोगों को रात में सही नींद नहीं आ पाती है या उनकी नींद पूरी नहीं होती है।
शरीर को सोने की आवश्यकता उम्र के हिसाब से बदलती रहती है। शिशुओं को एक दिन में १४ से १७ घंटे सोना जरूरी होता है, जबकि किशोरावस्था में ८ से १० घंटे की नींद जरूरी होती है और वयस्कों को ७ से ९ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है।
हालांकि, हर वयस्‍क को हर रात कम से कम ७ से ९ घंटे नींद की जरूरत होती है, लेकिन कुछ लोगों को इससे अधिक नींद की जरूरत भी पड़ सकती है। पर्याप्त नींद लेने का संकेत इस बात से मिलता है कि अगले दिन आप वैâसा महसूस करते हैं। अगर आप अगली सुबह उठकर थकान महसूस करते हैं और सारा दिन थका हुआ अनुभव करते हैं तो शायद आपको रात में अच्‍छी नींद नहीं आई होगी। आंकड़े बताते हैं कि हर तीन में से एक व्यक्ति अनिद्रा या तनाव से ग्रसित है। तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और व्यस्त दिनचर्या को अक्सर इसके लिए जिम्मेदार कारक माना जाता है।
हालांकि, लंबे समय तक नींद की कमी के परिणाम केवल खराब मनोदशा या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता तक ही सीमित नहीं हैं। अपर्याप्त नींद से मोटापा, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और टाइप २ मधुमेह जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। स्पष्ट है कि एक लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

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