शीतल अवस्थी
कार्तिक मास की तरह शास्त्रों में माघ मास को भी पुण्य मास कहा गया है। हिंदू धर्म पंचांग में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी बसंत पंचमी कहलाती है। इस दिन श्रीहरि विष्णु, श्री राधा-कृष्ण व शिक्षा की देवी माता सरस्वती की पूजा पीले फूल, गुलाल, अर्ध्य, धूप, दीप आदि द्वारा की जा जाती है। पूजा में पीले व मीठे चावल व पीले हलुवे का श्रद्धा से भोग लगाकर स्वयं इनका सेवन करने की परंपरा है।
बसंत पंचमी का दिन हिंदू कैलेंडर में पचंमी तिथि को मनाया जाता है। जिस दिन पचंमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है, उस दिन को सरस्वती पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से बसंत पचंमी चतुर्थी के दिन भी पड़ती है। इनमें ही एक कामना है सुखी दाम्पत्य जीवन। यह दिन मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन से बसंत शुरू होकर, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी तक रहता है। इसीलिए इसे ऋतु परिवर्तन का पर्व भी कहा जाता है।
बसंत पंचमी पर जीवन से जुड़ी कई तरह की इच्छाएं पूरी करने के लिए ज्ञान व बुद्धि की देवी सरस्वती की प्रसन्नता के तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की देवी माना जाता है। हिंदू कैलेंडर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य के समय को पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-
प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।
अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है, उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।
सनातन धर्म में बसंत पंचमी प्राकृतिक, व्यावहारिक व धार्मिक नजरिए से उत्साह व उमंग से भरी सबसे श्रेष्ठ व शुभ घड़ी मानी जाती है। मौसम के लिहाज से जहां शीत ऋतु की विदाई व वसंत ऋतु के आगमन की तैयारी सेहत को भी सुकून देती है, तो धर्म व लोक परंपराओं में यह ज्ञान की अधिष्ठात्री माता सरस्वती की पूजा का शुभ दिन है। खास तौर पर यह दिन सभी शुभ कामों के लिए स्वयंसिद्ध यानी अबूझ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्रता, श्रद्धा व साफ मन के साथ किए गए सारे शुभ काम देवी सरस्वती की कृपा से सफल होते हैं। भक्त लोग, ज्ञान प्राप्ति और सुस्ती, आलस्य एवं अज्ञानता से छुटकारा पाने के लिए आज के दिन देवी सरस्वती की उपासना करते हैं। कुछ प्रदेशों में आज के दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। दूसरे शब्दों में बसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ करने के लिए काफी शुभ माना जाता है इसीलिए माता-पिता आज के दिन शिशु को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्या आरंभ कराते हैं। सभी विद्यालयों में आज के दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है।
निर्णय क्षमता को असरदार बनाती है स्मरण शक्ति। खासतौर पर आज प्रतियोगी दौर में मानसिक कमजोरी पिछड़ने पर मजबूर करती है। यही वजह है कि दिमाग को तंदुरुस्त रखने के लिए जीवनशैली को नियमित बनाने के अलावा धार्मिक उपायों में बसंत पंचमी पर तो देवी सरस्वती का विशेष मंत्र से सुबह ध्यान बड़ा ही शुभ माना गया है। मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए शास्त्रों में बताए मां सरस्वती की इस मंत्र प्रार्थना का ध्यान माता को सफेद पूजा सामग्रियां चढ़ाकर करें, दूध की मिठाई का भोग लगाएं व आरती भी करें-
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।
