पीछे से नगाड़ा बजत बा, कुर्सी खातिर जीबऽ, कुर्सी खातिर मरबऽ आ जरूरत पड़ल त कुर्सी खातिर दलो बदलऽ। भागेलू राम मंच पर चढ़ताड़े। गले में दस गो माला, माथ पर चंदन, पीछे समर्थकन के भीड़।
भागेलू राम मूंछ पर ताव देत कहेलन, देखऽ जनता जनार्दन! राजनीति में स्थायी कुछ नइखे न दोस्ती, न दुश्मनी बस कुर्सी स्थायी होखे के चाहीं! भीड़ ताली पीटेला। भगेलू राम के खास आदमी पूछेला, नेताजी, पंद्रह बरिस में पच्चीस बेर पार्टी बदल देनी। अबकी कवन पार्टी? भागेलू राम हंस के कहेलन, जेकर सरकार, उहे हमार सरकार! जेकर कुर्सी, उहे हमार परिवार।
खास आदमी, बाकी नेताजी, विचारधारा? भागेलू राम चश्मा उतार के बोलेलें, विचारधारा से पेट भरता? ठेका-पट्टा, टेंडर, परमिट, मलाईदार विभाग, ई सब चाहीं कि ना?
खास आदमी चुप, तभी पार्टी हाईकमान के फोन आ जाला। भागेलू जी, अब आपकी उम्र हो गई है। आपको मार्गदर्शन मंडल में भेजा जा रहा है। भागेलू राम के चेहरा उतर जाला। का? मार्गदर्शन मंडल? अरे हम मार्गदर्शन देब कि सरकार चलाइब? टिकट काट के हमरा के बूढ़ा समझ लिहलऽ?
उ रात भागेलू राम विपक्ष के नेता के फोन मिलावेलन। नेताजी, टिकट चाहीं।
उधर से आवाज आवेला, लेकिन आप तो दूसरी पार्टी में हैं। भागेलू राम हंस पड़ेलन, पार्टी में हुई , बंधुआ मजदूर थोड़े हुई ! राजनीति में दरवाजा हमेशा खुलल रहेला। विपक्षी नेता पूछेला, आप जीतेंगे कैसे। भागेलू राम, जाति हमरा साथ, पैसा हमरा पास, समर्थक हमरा खास बाकी जनता के हम समझा लेब।
चुनाव हो जाला। नतीजा आवेला। भागेलू राम जीत गइलें! नई सरकार बनते ही उ गृहमंत्री बना दिहल जालें। शपथ लेते समय भागेलू राम हाथ उठाकर बोलताड़े, हम संविधान के रक्षा करब, पीछे खड़ा उनका पुरान साथी धीरे से कहेला, आ अपना कुर्सी के भी।
भागेलू राम आंख मार के मुस्कुरा देलें। अब जे लोग उनका टिकट काटले रहे, उनकर पुरान फाइल खुलना शुरू हो जाला। एक अफसर पूछेला, मंत्री जी, जांच एजेंसियन के इतना सक्रिय काहे कर दिहनी?
भागेलू राम कुर्सी पर पसर के कहेलन,
राजनीति में हिसाब-किताब जरूरी होला। आज हम सत्ता में बानी, काल्ह के पता नइखे इसलिए फाइल भी साथे रखल जरूरी बा। वैâमरा धीरे-धीरे पीछे हटेला। भागेलू राम कुर्सी पर मुस्कुरावत रहेलन। पर्दे पर आखिरी लाइन उभरती है। राजनीति में मौसम बदलते देर नइखे लागत बाकी असली खिलाड़ी उहे हऽ, जे हर मौसम में कुर्सी के छांव खोज ले।
समाप्त।
प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
