-मेहता की कंपनी के कारण पानी, मेट्रो पर लगा ब्रेक!
-सरनाईक ने बीजेपी विधायक की खोली पोल
-दिनोंदिन विकराल हो रही पानी समस्या
सुरेश गोलानी / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता में एक साथ विराजमान भाजपा और शिंदे गुट के बीच आगामी मीरा-भायंदर मनपा चुनाव में छिड़ी जंग दिन-ब-दिन तीव्र होती जा रही है। दोनों पक्षों के स्थानीय नेताओं का एक-दूसरे पर वार-पलटवार और कीचड़ उछालने का सिलसिला जारी है। शिंदे गुट के विधायक और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गुरुवार को प्रेस कॉन्प्रâेंस में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पर संगीन आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा मीरा-भायंदर के मतदाताओं को मूर्ख बना रही है। उन्होंने आगे कहा कि सूर्या क्षेत्रीय जल आपूर्ति परियोजना और मेट्रो रेल प्रकल्प में होने वाले विलंब के लिए मेहता और उनकी सेवन इलेवन कंपनी का निजी स्वार्थ पूरी तरह से जिम्मेदार है।
मेहता को बलात्कारी, स्वार्थी और कलंकित नेता की उपाधि देते हुए सरनाईक ने कहा कि एक आदमी के स्वार्थ के चलते शहर के नागरिक अभी तक पानी और मेट्रो रेल जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। इस बात के सबूत मीडिया के सामने रखते हुए सरनाईक ने दावा किया कि सूर्या क्षेत्रीय जल आपूर्ति परियोजना के तहत चेना इलाके में पाइपलाइन बिछाने के काम के लिए मेहता और उनकी कंपनी ने रास्ता देने से साफ इनकार कर दिया था, इसके अलावा मेट्रो रेल परियोजना के लिए स्टेयरकेस लैंडिंग की जमीन को गलत तरीके से अपना बताते हुए इसी कंपनी द्वारा निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाने की पुरजोर कोशिश की गई। नतीजतन दोनों महत्वपूर्ण योजनाओं को दो वर्ष से अधिक की देरी का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ मेहता ने सरनाईक पर एक प्रâस्ट्रेटेड (निराश) और सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी नेता होने का आरोप लगाते हुए उन पर कुछ वर्ष पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई कार्यवाई की यादें भी ताजा करने की कोशिश की।
क्या सीएम की भी नहीं सुनते हैं मेहता?
सरनाईक का कहना है कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मेहता द्वारा जनहित के कार्यों का विरोध और बाधा पहुंचाने के बारे में अवगत करवाया और मुख्यमंत्री द्वारा उनको प्रीतसाद भी मिला, दुर्भाग्यवश मेहता अपनी भूमिका पर अड़े रहे। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन भी नहीं करते? या फिर ऐसी कौनसी मजबूरी है, जिसकी वजह से मेहता की तानाशाही और मनमानी के खिलाफ भाजपा के राज्य-स्तरीय नेता कार्यवाही करने से कतराते हैं?
