-अब भाजपा कार्यकर्ताओं ने लगाए `५० खोखे’ के नारे!
-वॉर्ड १७३ में प्रचार के दौरान भिड़े दोनों के कार्यकर्ता
सुनील ओसवाल / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के ऐन पहले महायुति के भीतर की सच्चाई एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर उजागर हो गई है। वॉर्ड क्रमांक १७३ में प्रचार के दौरान उठे ५० खोखे एकदम ओके के नारों ने शिंदे गुट की राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं की इस नारेबाजी को राजनीतिक हलकों में शिंदे गुट की अवसरवादी राजनीति पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
शुक्रवार को वॉर्ड १७३ में प्रचार के दौरान भाजपा और शिंदे गुट के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए नारों ने शिंदे गुट को असहज कर दिया और उनके कार्यकर्ताओं में खलबली मच गई। गौरतलब है कि सहयोगी दल भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा यह नारा लगाए जाने से शिंदे गुट की नैतिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने बिना किसी आधिकारिक बयान के जमीनी स्तर पर शिंदे गुट को आईना दिखाने का काम किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पहले ही छत्रपति संभाजीनगर और पुणे में भाजपा-शिंदे गुट के बीच तालमेल टूट चुका है। मुंबई की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
अब नहीं चलेगी सौदेबाजी
-वहीं भाजपा नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि सहयोगी दलों के नाम पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक भाषा या सौदेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी विकास और पारदर्शिता की राजनीति करती है, जबकि शिंदे गुट बार-बार विवादों और आरोपों के घेरे में रहा है।
-मतदान से कुछ दिन पहले सामने आई यह घटना महायुति के भीतर शक्ति संतुलन को दर्शाती है। भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनावी मैदान में किसी की बैसाखी बनकर नहीं लड़ेगी।
-मुंबई की सियासत में उठा यह ‘५० खोखे’ का नारा अब केवल नारा नहीं, बल्कि शिंदे गुट की राजनीति पर सीधा वार बन चुका है।
