-ठाणे जिले के प्रशासनिक कामकाज पर साध रहे हैं निशाना
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य के स्थानीय निकाय चुनाव जनवरी २०२६ से पहले होने के संकेतों के साथ ही स्थानीय स्तर पर सत्तारूढ़ भाजपा और शिंदे गुट के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। ठाणे जिले में शिंदे को ठिकाने लगाने के लिए भाजपा के विधायकों सहित स्थानीय नेता मनपा प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिए हैं। क्योंकि उक्त महानगरपालिकाओं और नगरपालिकाओं के प्रशासनिक कामकाज में सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का हस्तक्षेप बताया जाता है इसलिए भाजपा ने अब शिंदे को ठिकाने लगाने के लिए प्रशासन की आड़ में भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोलना शुरू कर दिया है।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से ठाणे जिले में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और वन मंत्री गणेश नाईक के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। इसका असर जिले के अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बदलापुर शहर में भाजपा विधायक किसन कथोरे और शिंदे गुट के शहर प्रमुख वामन म्हात्रे के बीच विवाद गहराने की चर्चा है। विधायक कथोरे ने सीधे तौर पर अधिकारियों को नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार को सामने लाने की चेतावनी दी है। नगरपालिका की कुव्यवस्था के सबूत हर चौराहे पर देने की बात कहकर कथोरे ने नगरपालिका पर हावी शिंदे गुट को सीधी चुनौती दी है। इस बीच शहर के अन्य पदाधिकारियों और पूर्व नगरसेवकों के बीच भी यह टकराव बढ़ता जा रहा है।
इसी प्रकार भाजपा ने अंबरनाथ शहर की नागरिक समस्याओं को लेकर नगरपालिका प्रशासन पर हमला करना शुरू कर दिया है। अभिजीत करंजुले के माध्यम से भाजपा ने नगरपालिका क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट, सड़क और अन्य समस्याओं को लेकर नगरपालिका में ताला ठोंकने की धमकी दी है। यह धमकी शिंदे गुट को अप्रत्यक्ष रूप से दी गई है, ऐसी चर्चा है।
गणेश नाईक ने खोला मोर्चा
-इसके अलावा औद्योगिक शहर उल्हासनगर में भी कुछ दिन पहले भाजपा ने शहर की समस्याओं को लेकर आक्रामक रुख अपनाया था।
-स्थानीय विधायक कुमार आयलानी ने मनपा आयुक्त को सीधे आंदोलन की चेतावनी दी थी।
-यहां सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का प्रशासनिक मामलों में सबसे अधिक हस्तक्षेप रहता है। इसके साथ ही कल्याण-डोंबिवली शहर में भी भाजपा शहर की समस्याओं को लेकर आवाज उठा रही है।
-ठाणे में तो गणेश नाईक ने खुले तौर पर शिंदे के खिलाफ जनता दरबार से लेकर अन्य तरह की मुहिम चला रखी है।
-पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार से शिंदे गुट और भाजपा में टकराव दिखाई दे रहा है, उससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि दोनों दल स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे।
