-विपक्ष ने किया बहिष्कार…१३ मुद्दों पर ६ पन्नों के पत्र
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। महाविकास आघाड़ी ने मुख्यमंत्री के सरकारी चायपान कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए महायुति सरकार पर भ्रष्टाचार, ड्रग्स, बेरोजगार, पेपर लीक, महिला सुरक्षा और आम जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री को छह पन्नों का तीखा पत्र भेजकर सरकार को १३ मुद्दों पर पूरी तरह विफल बताया है।
मानसून सत्र शुरू होने से पहले रविवार को महाविकास आघाड़ी की ओर से आयोजित बैठक के बाद पत्रकार परिषद में यह जानकारी दी गई। इस दौरान विपक्ष ने कहा कि राज्य सूखे, जल संकट, किसान आत्महत्याओं, महंगाई, कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों से जूझ रहा है। ऐसे गंभीर मुद्दों से सरकार मुंह मोड़ते नजर आ रही है। जबकि सरकार अपना दायित्व भूलकर विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को तोड़ने और राजनीतिक जोड़-तोड़ में व्यस्त है। विपक्ष ने कहा कि जब राज्य इतने गंभीर संकटों से गुजर रहा है, तब औपचारिक चायपान कार्यक्रम में शामिल होना जनता के साथ अन्याय होगा।
सरकार को घेरने की बनाई रणनीति
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह विधानसभा सत्र के दौरान इन सभी मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। इस दौरान पूर्व विपक्ष नेता अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि किसानों को कर्जमाफी के नाम पर छल किया गया। चुनाव के दौरान खेतों का सातबारा कोरा करने का वादा किया गया था, लेकिन अब कर्जमाफी को शर्तों के जाल में फंसा दिया गया है। दूसरी ओर प्याज उत्पादक किसानों को लागत से भी कम दाम मिल रहे हैं। कई किसानों को अपनी उपज बेचने के बाद मामूली रकम ही हाथ लगी है। विवादित शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर किसानों की जमीन छीनने का आरोप लगाया है। वहीं लाडली बहन योजना में बड़ी संख्या में लाभार्थियों को अपात्र घोषित किए जाने को भी सरकार की प्रशासनिक विफलता बताया गया है।
`शिवसेना नेता भास्कर जाधव ने कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। महिलाओं और बच्चों पर हो रहे अपराधों में बढ़ोतरी, नशे के बढ़ते कारोबार और विभिन्न कथित घोटालों को सरकार की विफलता का प्रमाण बताया गया है।’
`कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने महंगाई और र्इंधन संकट को लेकर भी सरकार पर हमला बोला है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जबकि सरकार राहत देने में असफल रही है।’
