“अगली कैबिनेट से पहले राहत पहुँचे, वरना निलंबन तय”
₹31 हजार करोड़ की मदद योजना — लेकिन कई जिलों में अब तक किसानों के खातों में रकम नहीं पहुँची; “दैनिक दोपहर का सामना” की रिपोर्ट के बाद सरकार में हड़कंप
राजन पारकर / मुंबई
राज्य मंत्रिमंडल की आज हुई बैठक में किसानों की आर्थिक सहायता का मुद्दा जोरदार रूप से गूंजा। दिवाली के ठीक पहले भी हजारों किसान अब तक सरकारी राहत राशि की प्रतीक्षा में हैं। इसी पृष्ठभूमि में “दैनिक दोपहर का सामना” में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट “किसानों की काली दिवाली — सरकार की मदद अब तक न पहुँचने से नाराज़गी” के माध्यम से यह सवाल उठाया था कि सरकार की घोषित सहायता जमीन पर क्यों नहीं उतर रही। इस रिपोर्ट के बाद सरकार के गलियारों में हड़कंप मच गया और मुख्यमंत्री ने खुद सख्त रुख अपनाया।
कैबिनेट बैठक में कई मंत्रियों ने अपने-अपने जिलों में सहायता वितरण में हो रही भारी देरी पर नाराज़गी जताई। अमरावती, बीड, लातूर, बुलढाणा और परभणी जैसे जिलों में अब तक एक भी किसान के खाते में राशि न पहुँचने पर तीखी चर्चा हुई। इस पर उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त विभाग के सचिव को सीधे संबोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी —
“वित्त विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निधि पहले ही जारी कर दी गई है। फिर भी यदि किसानों तक मदद नहीं पहुँच रही है और कुछ अधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि खराब कर रहे हैं, तो अगली कैबिनेट बैठक तक उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।”
फडणवीस ने आगे कहा कि किसानों तक राहत पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर पात्र किसान के खाते में राशि जमा होने की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सरकार को सौंपनी होगी। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस प्रक्रिया में लापरवाही करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री ने “दैनिक दोपहर का सामना” से औपचारिक बातचीत में पुष्टि की कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में जिलाधिकारियों को यह सख्त “सज्जड दम” (कड़ा अल्टीमेटम) दिया है। मंत्री ने कहा कि फडणवीस का यह बयान किसी भी अधिकारी के लिए चेतावनी से कम नहीं है।
सरकार के इस रुख के बाद जिला प्रशासन में हलचल मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, अब कई जिलों में निधि वितरण प्रक्रिया को तत्काल गति देने के निर्देश जारी किए गए हैं। संबंधित विभागों में अतिरिक्त बैठकें बुलाई जा रही हैं।
शासन द्वारा घोषित ₹31,000 करोड़ के राहत पैकेज से किसानों को उम्मीद थी कि दिवाली से पहले उनके खातों में सहायता राशि पहुँच जाएगी, लेकिन कई जिलों में भुगतान न होने से किसानों में भारी निराशा और आक्रोश फैल गया है। सूखे और फसल हानि से पहले ही परेशान किसान अब सरकार की निष्क्रियता से और निराश हुए हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट अल्टीमेटम के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर तेजी देखी जा रही है। जिलाधिकारी और तहसील स्तर के अधिकारी राहत वितरण की प्रक्रिया में जुट गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आगामी कुछ दिनों में राहत की राशि अधिकांश किसानों के खातों में पहुँच जाएगी और राज्य सरकार दिवाली से पहले किसानों को राहत देने का अपना वादा निभा सकेगी।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि “दैनिक दोपहर का सामना” की खबरों का असर न केवल जनता तक सीमित है, बल्कि सत्ता के गलियारों तक भी पहुँचता है। सरकार की बैठकों में उठने वाले सवालों की दिशा तय करने में जनसंचार माध्यमों की भूमिका आज भी उतनी ही प्रभावशाली है। मुख्यमंत्री फडणवीस का यह रुख अब यह तय करेगा कि किसानों की “काली दिवाली” सच में उजियारा देख पाएगी या नहीं।
