अनिल मिश्र / रांची
रात को अपने घरों से बाहर नहीं निकले,हाथियों से रहें दूर कुछ इस तरह की शब्दों की गुंज झारखंड प्रदेश के चाईबासा जिले में सुनने को मिल रही है।इस तरह के शब्दों से वन विभाग लगातार लोगों से ऐसे ही अपील कर रहा है।इसका दरअसल कारण है एक जंगली हाथी, जिसके बड़े-बड़े दांत हैं।झारखंड के चाईबासा जिले में इन दिनों इस दंतैल हाथी ने आतंक और तांडव मचा रखा है।इसके आतंक से मासूम लोगों की जान जा रही है। वहीं झारखंड प्रदेश वन विभाग और चाईबासा जिला प्रशासन बिल्कुल बेबस नजर आ रहे हैं।इस एक हाथी ने पिछले ग्यारह दिनों में लगभग बाईस से तेईस लोगों की जान ले लिया है। वहीं इसके बाद भी इसका गुस्सा शांत नहीं हुआ है । वहीं ये लगातार लोगों पर हमला कर रहा है। इसे वन विभाग ने तीन बार इसे ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया ,लेकिन तीनों ही प्रयास विफल रहाl जब वन विभाग का ट्रेंकुलाइज करने का भी प्रयास विफल रहा तो विभाग ने शुक्रवार देर शाम घंटों की मशक्कत के बाद हाथी को उड़िसा के जंगलों की ओर खदेड़ दिया।लेकिन पहले से ही मुस्तैद पड़ोसी राज्य उड़िसा के वन कर्मियों ने सुरक्षा कारणों से हाथी को वापस झारखंड की ओर खदेड़ दिया। इसके साथ ही देर रात हाथी ने फिर से चाईबासा सीमा में प्रवेश कर गया, जिसके बाद से वन विभाग की टीमें ‘सर्च ऑपरेशन’ में जुटी हैं।वहीं इसको लेकर आम लोगों में भारी दहशत व्याप्त हैl इस
दंतैल हाथी को काबू करने के लिए पश्चिम बंगाल, उड़िसा और गुजरात से ‘ वन तारा रेस्क्यू टीम’ को बुलाया गया है। इस रेस्क्यू टीम ने आधुनिक संसाधनों के साथ मोर्चा संभाला है। लेकिन हाथी की आक्रामकता के आगे विशेषज्ञ भी बेबस नजर आ रहे हैं। रेस्क्यू के दौरान ही हाथी ने टीम के एक विशेषज्ञ पर जानलेवा हमला कर दिया है।जिलके बाद गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गईl दरअसल यह हाथी ने एक जनवरी से अब तक कुल तेईस लोगों की जान ले चुका है। वहीं वन अधिकारियों के मुताबिक, झुंड से बिछड़ने के कारण यह हाथी अत्यंत हिंसक हो गया है। इसकी रफ्तार भी चिंता का विषय है।यह प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है, जिससे इसकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। यह लगातार मूव कर रहा है। और इसके बीच में जो आ रहा है, उस पर यह हमला कर रहा हैlचाईबासा में इस हाथी का आतंक एक जनवरी से शुरू है।टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव निवासी 35 वर्षीय मंगल सिंह हेंब्रम, बिरसिंहहातु गांव के कुचु बासा टोली निवासी 55 वर्षीय उर्दूप बहंदा, सदर प्रखंड के रोरो गांव निवासी 57 वर्षीय विष्णु सुंडी को इसी हाथी ने जान से मार डाला है। वहीं इसी दिन हाथी के हमले में मानी कुंटिया और सुखमति बहंदा गंभीर रूप से घायल हुएlएक जनवरी के बाद से यह लगातार हमले कर रहा है. इस हाथी ने नोवामुंडी के बाबरिया गांव 6 जनवरी की रात एक ही परिवार के 5 लोगों की जान ले लिया। मृतकों में पति-पत्नी, उनके दो मासूम बच्चे और दूसरे परिवार का एक सदस्य शामिल है।घटना रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जब सभी लोग अपने-अपने घरों में सो रहे थे।तभी अचानक हाथी ने घर पर हमला कर दिया। इस हमले में परिवार का एक बच्चा किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहाl हाथी का आतंक सिर्फ बाबरिया गांव तक सीमित नहीं रहा।बड़ा पासीया गांव में भी हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई।
वहीं लांपाईसाई गांव में एक अन्य व्यक्ति को हाथी ने रौंदकर मार डाला।इन दोनों गांवों में मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। वहीं इसके अलावा हाटगम्हरिया क्षेत्र में भी हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हुईl इस बीच चाईबासा डीएफओ ने बताया कि हाथी बहुत तेजी से अपनी जगह बदल रहा है, जिससे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीमों के लिए लगातार उसे ट्रैक करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। उनके अनुसार, हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू करने की प्रक्रिया में मदद के लिए पश्चिम बंगाल से एक्सपर्ट्स की एक टीम बुलाई गई है।वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ की टीम से भी संपर्क किया गया है, और उनकी टीम के आने के बाद आगे की कार्रवाई तेज की जाएगीl
