फिरोज खान
मालवणी पुलिस को गांववालों से सूचना मिली कि समुद्र किनारे झाड़ियों के बीच दलदल में एक बोरी पड़ी है, जिससे तेज बदबू आ रही है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बोरी बाहर निकलवाई। बोरी का मुंह मजबूत रस्सी से बंधा था। बोरी खोली तो उसमें एक युवती की लाश मिली। मृतका की उम्र ४०-४५ साल के आस-पास लग रही थी। शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था, जबकि उसके गहने जस के तस थे। शरीर पर चोटों के साफ निशान थे और सिर पूरी तरह कुचला हुआ था, शायद पहचान मिटाने के लिए। जांच तभी आगे बढ़ सकती थी जब लाश की शिनाख्त हो जाती।
पुलिस पहचान में जुटी ही थी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई। रिपोर्ट से पता चला कि हत्या के बाद लाश के साथ दुष्कर्म किया गया था। इसी बीच पुलिस को मालूम हुआ कि मालवणी के अंबूवाडी निवासी आजाद नामक शख्स ने २०-२२ साल की अपनी पत्नी रूबी की गुमशुदगी दर्ज कराई है। पुलिस जब आजाद से मिलने पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला। उसके बड़े भाई रईस ने लाश पहचानने से इनकार करते हुए कहा कि रूबी किसी प्रेमी के साथ भाग गई है। लाश की शिनाख्त में कई महीने बीत गए। पुलिस ने कूपर, सायन और केईएम अस्पताल के डॉक्टरों से फॉरेंसिक जांच कराई। जांच में सामने आया कि लाश ४०-४५ की नहीं, बल्कि २०-२२ साल की युवती की थी और मौत लाश मिलने से ७ दिन पहले हुई थी। इस जानकारी के बाद आजाद और रईस शक के घेरे में आ गए। पुलिस को यकीन हो गया कि लाश रूबी की ही है।
पुष्टि के लिए जब पुलिस रईस के घर पहुंची तो ताला लगा मिला। पड़ोसियों से पूछताछ में एक पड़ोसी ने बताया कि रूबी भागी नहीं थी, उसे गायब किया गया था। उसकी चप्पलें घर के बाहर ही पड़ी थीं और उस दिन घर से चीखने की आवाजें भी आई थीं। मुंबई पुलिस रईस, आजाद और रूबी के माता-पिता को उत्तर प्रदेश से मुंबई ले आई। मॉर्चरी में लाश देखकर माता-पिता ने शिनाख्त अपनी बेटी रूबी के रूप में की। इसके बाद लाश उन्हें सौंप दी गई। पूछताछ में आजाद निर्दोष निकला, उसे छोड़ दिया गया।
सख्ती से पूछताछ पर रईस टूट गया और उसने जुर्म कबूल कर लिया। रईस ने बताया कि वह अपनी भाभी रूबी से एकतरफा इश्क करता था। रूबी ने यह बात पति आजाद को बता दी थी। इसी बात से बदला लेने की आग में वह जल रहा था। घटना वाले दिन दोपहर करीब २ बजे वह अपने दोस्त के साथ रूबी के घर पहुंचा। तीनों ने मिलकर रूबी को दबोचा और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद रईस ने लाश के साथ दुष्कर्म किया। पहचान छिपाने के लिए कपड़े उतारकर सिर कुचल दिया। लाश को बोरी में भरकर, हाथ-पैर बांधकर, रस्सी से मुंह कस दिया। रात होने पर तीनों ने बोरी समुद्री झाड़ियों के बीच दलदल में फेंक दी।
