-मनी लॉन्ड्रिंग के तहत तीन संस्थाओं की जांच शुरू
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लेह में बुधवार को लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संघ राज्य क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर जेन-जी के आंदोलन ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। इसके बाद सीबीआई एक्टिव हो गई है। इस आंदोलन के सूत्रधार सोनम वांगचुक के शिक्षण संस्थानों के फंड की जांच शुरू हो गई है। इस आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में ४ प्रदर्शनकारियों की मौत और करीब ५० जख्मी हुए हैं।
खबर है कि सीबीआई ने वांगचुक द्वारा स्थापित तीन संस्थानों – ‘एचआईएएल’, ‘एससीईएमओएल’ और उनकी निजी कंपनी ‘शेश्यों’ के ऊपर कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाकर जांच शुरू की है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, इन संस्थानों के बैंक खातों और फंड ट्रांसफर में कई अंतर पाए गए हैं, जिससे विदेशी मुद्रा विनियम अधिनियम और अन्य वित्तीय नियमों का उल्लंघन होने का शक है। जानकारी के मुताबिक, एचआईएएल को २०२३-२४ में ६ करोड़ रुपए का योगदान मिला था, जो २०२४-२५ में बढ़कर १५ करोड़ रुपए से अधिक हो गया। संस्थान के सात बैंक खातों में से चार कथित रूप से घोषित नहीं किए गए। इसके अलावा, एचआईएएल को १.५ करोड़ से अधिक विदेशी योगदान बिना वैध पंजीकरण के मिला। एचआईएएल से शेश्यों में लगभग ६.५ करोड़ रुपए का ट्रांसफर भी जांच में है। हालांकि इस बारे में वांगचुक का कहना है उनहोंने कोई विदेशी फंड नहीं लिया है और सिर्फ विदेशों में शिक्षा का प्रचार प्रसार किया है।
मैं जेल जाने को तैयार!
आंदोलन के सूत्रधार सोनम वांगचुक का कहना है कि उन्हें बलि का बकरा बनाकर गिरफ्तार करने की तैयारी चल रही है। पर वे किसी से डरते नहीं और जेल जाने को तैयार हैं।
लद्दाख की लड़ाई पूरे देश की बन सकती है!
आज लद्दाख की लड़ाई, कल पूरे देश की बन सकती है। जब सरकार लोकतंत्र की आवाज दबाती है तो जनता का कर्तव्य है कि वह और आवाज बुलंद करे। आज लद्दाख में जो हो रहा है, वो बेहद चिंताजनक है।
२०१९ के बाद क्या बदला है?
अब समय आ गया है कि भारत सरकार ईमानदारी और गंभीरता से यह आकलन करे कि २०१९ के बाद से वास्तव में क्या बदला है? स्थिति जस की तस है। युवाओं में असंतोष है।
