मुख्यपृष्ठनए समाचार१६ लाख वोटरों पर सीईओ का वार ऑब्जर्वर को खबर तक नहीं!

१६ लाख वोटरों पर सीईओ का वार ऑब्जर्वर को खबर तक नहीं!

-बंगाल एसआईआर में किसका खेल?
सामना संवाददाता / कोलकाता
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब करीब १६ लाख पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की मांग को लेकर दायर अपीलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि एसआईआर की निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले स्पेशल रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने ही इन अपीलों की जानकारी होने से इनकार किया है।
३० अक्टूबर को सामने आए उनके बयान के मुताबिक, लगभग ६० लाख मामलों को न्यायिक अधिकारियों के पास भेजा गया था। इनमें करीब ३३ लाख लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने के योग्य पाया गया। इसके बावजूद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय की ओर से लगभग १६.१० लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें दायर की गईं। गुप्ता का कहना है कि उन्हें इन अपीलों के बारे में मीडिया के जरिए जानकारी मिली। उनका दावा है कि न्यायिक अधिकारियों के काम संभालने के बाद पर्यवेक्षकों के पास इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं थी। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब चुनाव आयोग ने २६ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि ये अपीलें पश्चिम बंगाल सीईओ कार्यालय के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दायर की थीं। आयोग के अनुसार, इस मामले की जानकारी उसके समक्ष अलग से नहीं लाई गई थी। सवाल यह है कि जब न्यायिक अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद मतदाताओं को पात्र घोषित कर दिया था, तो उनके फैसलों को चुनौती देने के लिए इतनी बड़ी संख्या में अपीलें किस आधार पर दायर की गईं? किस अधिकारी ने इसकी मंजूरी दी? किन तथ्यों के आधार पर लाखों मतदाताओं की पात्रता पर दोबारा सवाल उठाया गया?

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